Ranchi: झारखंड में पेसा अधिनियम को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर पेसा कानून की मूल भावना से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि सरकार ने अधिकार देने के नाम पर आदिवासी समाज के साथ छल किया है और यह कानून खास हित समूहों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लाया गया है.
‘पेसा की आत्मा से किया गया समझौता’
बाबूलाल मरांडी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि पेसा अधिनियम जिस उद्देश्य से बनाया गया था, मौजूदा स्वरूप उससे बिल्कुल अलग है. उनका आरोप है कि हेमंत सोरेन सरकार ने कानून की आत्मा को कमजोर कर आदिवासी स्वशासन की अवधारणा पर चोट की है. उन्होंने इसे आदिवासी समाज की भावनाओं के साथ सीधा खिलवाड़ बताया.
ग्राम सभा की स्वायत्तता पर सवाल
मरांडी ने पेसा के प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उपायुक्त के नेतृत्व में टीम बनाकर ग्राम सभाओं के अधिकारों में हस्तक्षेप किया जा रहा है. उनके अनुसार, इससे ग्राम सभा की स्वायत्तता कमजोर होती है, जबकि पेसा कानून का मूल उद्देश्य ग्राम सभाओं को सशक्त बनाना है.
बालू घाटों के अधिकारों को लेकर आपत्ति
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि जब पूरा जिला अधिसूचित क्षेत्र में आता है, तो ग्राम सभाओं के अधिकार केवल 5 हेक्टेयर या उससे कम क्षेत्र वाले ग्रेड-1 बालू घाटों तक ही क्यों सीमित किए गए. उन्होंने कहा कि ग्रेड-2 बालू घाटों में ग्राम सभा को सिर्फ अनुमति देने तक सीमित रखना समझ से परे है और यह अधिकारों में कटौती का संकेत देता है.
झामुमो-कांग्रेस-राजद पर निशाना
बाबूलाल मरांडी ने झामुमो, कांग्रेस और राजद पर आदिवासी हितों की अनदेखी का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सत्ता और राजनीतिक स्वार्थ के लिए बार-बार आदिवासी समाज की भावनाओं से समझौता किया गया है. मरांडी के अनुसार, झारखंड आंदोलन की मूल भावना से पहले ही समझौता हो चुका है और अब पेसा कानून में बदलाव कर उसी परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है.
बीजेपी का विरोध जारी रहेगा
नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी पेसा कानून के मौजूदा स्वरूप का विरोध करती रहेगी. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के अधिकारों के साथ किसी भी तरह की हेरा-फेरी को बीजेपी स्वीकार नहीं करेगी और इस मुद्दे को सड़क से सदन तक उठाया जाएगा.


