हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड स्थित गोंदुलपारा खनन परियोजना को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जनसुनवाई के दौरान भारी बवाल देखने को मिला. जनसुनवाई शुरू होने से पहले ही अज्ञात लोगों ने पंडाल में घुसकर जमकर तोड़फोड़ की. इस दौरान कुर्सियों को तोड़ दिया गया और जनसुनवाई में शामिल होने आए लोगों के साथ मारपीट की गई.
मिली जानकारी के अनुसार, गोंदुलपारा अडानी कोल ब्लॉक परियोजना को लेकर प्लस टू हाई स्कूल परिसर में जनसुनवाई आयोजित की गई थी, जिसका ग्रामीणों और विस्थापन विरोधी संगठनों ने कड़ा विरोध किया. विरोध कर रहे लोग इस दिन को “काला दिन” के रूप में मना रहे थे. इसी बीच अज्ञात लोगों ने वहां मौजूद महिलाओं और पुरुषों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया. हमलावरों ने जनसुनवाई के लिए लगाए गए फर्नीचर और अन्य सामानों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया.
इस घटना को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन झारखंड की स्थिति संभालने में विफल हैं और विदेशों में पूंजीपतियों को रिझाने में व्यस्त हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में जंगलराज की स्थिति बन चुकी है. मरांडी ने कहा कि हजारीबाग के बड़कागांव प्रखंड में पुलिस की मौजूदगी के बावजूद नकाबपोश गुंडों द्वारा महिलाओं पर लाठियां बरसाई जा रही हैं और धारदार हथियारों से हमला किया जा रहा है, जबकि पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है.
वहीं इस पूरे मामले को लेकर बवाल न्यूज़ ने पूर्व विधायक अंबा प्रसाद से बातचीत की. उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी द्वारा लोगों को दो हजार रुपये देकर हंगामा कराने के लिए लाया गया है, ताकि स्थानीय लोगों को उनका अधिकार न मिल सके. अंबा प्रसाद ने कहा कि वे संघर्ष करने वाले लोग हैं और जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी.
इस मामले पर वर्तमान विधायक रोशन लाल चौधरी ने कहा कि विस्थापन को लेकर सरकार के पास कोई स्पष्ट नीति नहीं है, इसी कारण आम लोग लगातार परेशान हैं. उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि आम जनता के खिलाफ सख्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी. विधायक ने बताया कि वे स्वयं घटना स्थल पर मौजूद हैं.



