घाटशिला उपचुनाव: BJP ने भेजे चार नाम, बाबूलाल सोरेन की दावेदारी सबसे प्रबल, दिल्ली में तय होगा प्रत्याशी
घाटशिला विधानसभा उपचुनाव की तिथि की घोषणा के बाद से ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. पूर्व शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के निधन के चलते हो रहे इस उपचुनाव को लेकर इंडिया गठबंधन और एनडीए दोनों ने जीत की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है. जमशेदपुर संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली इस सीट का इतिहास लगभग सभी प्...


घाटशिला विधानसभा उपचुनाव की तिथि की घोषणा के बाद से ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. पूर्व शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के निधन के चलते हो रहे इस उपचुनाव को लेकर इंडिया गठबंधन और एनडीए दोनों ने जीत की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है. जमशेदपुर संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली इस सीट का इतिहास लगभग सभी प्रमुख दलों के लिए अनुकूल रहा है. राज्य गठन के बाद हुए पांच विधानसभा चुनावों में कांग्रेस, भाजपा और झामुमो—तीनों दलों ने यहां जीत का स्वाद चखा है. हालांकि, पिछले दो चुनावों से झामुमो का दबदबा कायम रहा है, ऐसे में इंडिया गठबंधन के लिए इस सीट को बरकरार रखना आसान नहीं होगा.
भाजपा ने उपचुनाव को लेकर अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है. पार्टी ने चार संभावित उम्मीदवारों के नाम केंद्रीय नेतृत्व को भेजे हैं. इनमें बाबूलाल सोरेन, लखन मार्डी, सुनीता देवदूत सोरेन और रमेश हांसदा के नाम शामिल हैं. अंतिम फैसला दिल्ली में होने वाली संसदीय बोर्ड की बैठक में लिया जाएगा. पार्टी सूत्रों की मानें तो बाबूलाल सोरेन की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है और उनके नाम की घोषणा महज औपचारिकता भर रह गई है.
प्रदेश नेतृत्व ने इन चार नामों को पंचायत स्तर तक कराए गए सर्वे और वरिष्ठ नेताओं से विचार-विमर्श के बाद शॉर्टलिस्ट किया है. उल्लेखनीय है कि बाबूलाल सोरेन पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पुत्र हैं. पिछली बार भी भाजपा ने उन्हें घाटशिला से मैदान में उतारा था, हालांकि वे 22 हजार मतों से हार गए थे. वहीं, उनके पिता चंपाई सोरेन ने जीत दर्ज की थी. बाद में चंपाई और बाबूलाल, दोनों भाजपा में शामिल हो गए.
अन्य दावेदारों की बात करें तो लखन मार्डी ने 2019 में भाजपा के टिकट पर घाटशिला से चुनाव लड़ा था. वहीं, सुनीता सोरेन और रमेश हांसदा पार्टी संगठन में विभिन्न पदों पर सक्रिय रूप से कार्य कर चुके हैं. अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि भाजपा औपचारिक रूप से किस नाम पर मुहर लगाती है और यह उपचुनाव किस करवट बैठता है.

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