पलामू में रहस्यमयी बीमारी से 10 दिन में एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत, अंधविश्वास पर उठे सवाल
झारखंड के पलामू जिले के सिक्का गांव में रहस्यमयी बीमारी से एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई है। 10 दिनों के भीतर हुई इन मौतों से इलाके में दहशत फैल गई है। मामले में अंधविश्वास और झाड़-फूंक के कारण समय पर इलाज न मिलने के आरोप भी सामने आए हैं।

Palamu: झारखंड के पलामू जिले के पड़वा प्रखंड स्थित सिक्का गांव से एक बेहद दर्दनाक और चिंताजनक मामला सामने आया है. यहां महज 10 दिनों के भीतर एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत ने पूरे इलाके को दहला दिया है. परिवार के आखिरी मृतक 20 वर्षीय नकुल महतो ने रांची के रिम्स अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. इससे पहले उसके पिता कुलदीप महतो, बहन बबीता कुमारी, नाबालिग बहन इंदु कुमारी और भाभी श्वेता देवी की भी मौत हो चुकी है. परिवार की एकमात्र जीवित सदस्य लाखो उर्फ लाखी देवी का इलाज फिलहाल रिम्स में जारी है. इस घटना के बाद रहस्यमयी बीमारी, अंधविश्वास और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. ग्रामीणों के अनुसार परिवार लंबे समय से झाड़-फूंक और ओझा द्वारा दिए गए भभूत पर भरोसा करता था, जिससे समय पर इलाज नहीं हो सका और हालात लगातार बिगड़ते चले गए.
अंधविश्वास बना मौत की बड़ी वजह
ग्रामीणों और स्थानीय प्रशासन के अनुसार इस पूरे मामले में अंधविश्वास की भूमिका भी सामने आई है. बताया जा रहा है कि परिवार के सदस्य किसी बीमारी के बाद इलाज के लिए डॉक्टरों के बजाय ओझा-गुणी के पास पहुंचे थे. वहां से मिले भभूत को सरसों के तेल में मिलाकर सेवन किया जाता था. गांव वालों का कहना है कि ओझा ने दावा किया था कि इससे बीमारी ठीक हो जाएगी. जब परिवार के कई सदस्य बीमार पड़े तो उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वे बार-बार इलाज बीच में छोड़कर भाग जाते थे और झाड़-फूंक का सहारा लेते थे. समय पर उचित चिकित्सा नहीं मिलने के कारण उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई. इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में फैले अंधविश्वास और आधुनिक चिकित्सा से दूरी के गंभीर परिणामों को उजागर कर दिया है.
रहस्यमयी बीमारी पर अब भी बना हुआ है सस्पेंस
लगातार पांच मौतों के बावजूद अब तक बीमारी का सही कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है. परिवार के मुखिया कुलदीप महतो की 19 जून की रात और बेटी बबीता कुमारी की 20 जून की सुबह मौत हो गई थी. इसके बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हुआ, लेकिन पोस्टमार्टम होने के बावजूद बीमारी की पुष्टि नहीं हो सकी. स्थानीय लोगों का सवाल है कि एक सप्ताह से अधिक समय बीतने के बाद भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं हुई. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. श्रवण कुमार मेहता ने बताया कि पीड़ितों को काफी प्रयास के बाद इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया था, लेकिन वे बार-बार अस्पताल छोड़कर चले जाते थे. अधिकारियों का कहना है कि जब तक विस्तृत जांच रिपोर्ट नहीं आती, तब तक मौत की असली वजह बताना संभव नहीं होगा.
स्वास्थ्य विभाग की चुनौती और जांच पर टिकी उम्मीद
इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतियों को भी उजागर किया है. मेदिनीनगर स्थित एमएमसीएच में फोरेंसिक जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण मौत के कारणों की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हो सकी है. चिकित्सकों का कहना है कि फोरेंसिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मौत किसी संक्रमण, विषाक्त पदार्थ या किसी अन्य कारण से हुई. स्वास्थ्य विभाग की टीम 20 जून को सिक्का गांव पहुंची थी, लेकिन उस समय परिवार के अन्य सदस्य घर पर नहीं मिले. बाद में उन्हें अलग-अलग स्थानों से खोजकर अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान तीन और मौतें हो गईं. फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और प्रशासन लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने तथा बीमारी की स्थिति में तुरंत डॉक्टर से इलाज कराने की अपील कर रहा है.

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