28 करोड़ के घोटाले के बाद डीजीपी अलर्ट, पुलिसकर्मियों के 12 साल के वेतन पर छानबीन
झारखंड में ट्रेज़री घोटाले के बाद पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है. DGP तदाशा मिश्रा ने सभी जिलों में पुलिसकर्मियों के पिछले 12 साल के वेतन की जांच के आदेश दिए हैं. हजारीबाग और बोकारो में करोड़ों रुपये की अवैध निकासी का खुलासा हुआ है, जिसके बाद कई आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं.


Ranchi: झारखंड में ट्रेज़री घोटाले ने पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है. बोकारो और हजारीबाग में पुलिसकर्मियों के वेतन के नाम पर हुई करोड़ों रुपये की अवैध निकासी के मामले ने अब पूरे राज्य को अपनी चपेट में ले लिया है. डीजीपी तदाशा मिश्रा ने इस गंभीर अनियमितता को देखते हुए सख्त कदम उठाए हैं. उन्होंने सभी 24 जिलों तथा पुलिस की तमाम इकाइयों में पिछले 12 वर्षों की वेतन निकासी की विस्तृत जांच का आदेश जारी कर दिया है.
यह घोटाला मुख्य रूप से पुलिस विभाग के अकाउंट सेक्शन में फर्जीवाड़े से जुड़ा है, जिसमें सेवानिवृत्त या गैर-कर्मचारियों के नाम पर वेतन निकाला गया. प्रारंभिक जांच में हजारीबाग में 15 से 28 करोड़ रुपये तक की अनियमित निकासी का खुलासा हुआ, जबकि बोकारो में भी कई करोड़ की राशि गबन का मामला सामने आया. डीजीपी ने गुरुवार शाम को सभी जिलों के एसपी, डीआईजी और आईजी स्तर के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की और मामले की गंभीरता पर चर्चा की. इसके बाद डीआईजी बजट की ओर से सभी इकाइयों को सात दिनों के अंदर रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया गया है.
इस जांच का मकसद न केवल अनियमितताओं का पता लगाना है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सिस्टम को मजबूत बनाना भी है. वित्त विभाग ने भी सभी कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिससे पुलिसकर्मियों में चिंता का माहौल है.
जांच का दायरा बढ़ा, रिपोर्ट मांगी
डीजीपी तदाशा मिश्रा के आदेश पर अब पूरे झारखंड में पुलिसकर्मियों की 12 साल की वेतन निकासी की जांच शुरू हो गई है. बोकारो और हजारीबाग में शुरू हुए मामले के बाद संकेत मिले हैं कि यह अनियमितता अन्य जिलों में भी हो सकती है. इसलिए सभी जिलों के एसपी और पुलिस इकाइयों के प्रमुखों को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है.
जांच में फर्जी जन्मतिथि बदलने, सेवानिवृत्त कर्मियों के नाम पर सक्रिय वेतन दिखाने और बिना सत्यापन के निकासी जैसे तरीके सामने आए हैं. पुलिस मुख्यालय ने साफ निर्देश दिए हैं कि आगे ऐसी लापरवाही न हो, इसके लिए सख्त सावधानी बरती जाए. सात दिनों के अंदर रिपोर्ट जमा न करने पर अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है. यह व्यापक जांच न केवल घोटाले की जड़ तक पहुंचेगी, बल्कि विभागीय पारदर्शिता भी सुनिश्चित करेगी.
आरोपी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई
इस घोटाले में शामिल पुलिसकर्मियों पर पद के दुरुपयोग और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में अलग-अलग मामले दर्ज किए जाएंगे. अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और उनके बैंक खातों को सीज कर दिया गया है. पुलिस मुख्यालय जल्द ही पूरे मामले की जांच के लिए एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) को सिफारिश भेजने की तैयारी कर रहा है.
आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी या कर्मचारी ऐसा जोखिम न उठाए. विभाग ने साफ संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. यह कदम न केवल दोषियों को सजा दिलाएगा, बल्कि पूरे पुलिस बल में अनुशासन और ईमानदारी को बढ़ावा भी देगा. कुल मिलाकर, यह जांच झारखंड पुलिस को स्वच्छ और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.

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