Bihar DPO Ajit Amar : 27 लाख की सैलरी, 2.51 करोड़ का लेन-देन, जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
बिहार के सारण जिले के DPO अजित अमर पर आय से अधिक संपत्ति का आरोप है. जांच में सामने आया कि 32 महीने में 27 लाख की सैलरी के मुकाबले उनके खातों में 2.51 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन हुआ.


बिहार के सारण जिले में तैनात एक जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) आय से अधिक संपत्ति के आरोपों को लेकर जांच के घेरे में हैं. जांच समिति की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अधिकारी की 32 महीने की कुल सैलरी करीब 27.43 लाख रुपये थी, लेकिन इसी अवधि में उनके और उनकी पत्नी के बैंक खातों से 2.51 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन हुआ. इस खुलासे के बाद मामला राज्य शिक्षा विभाग तक पहुंच गया है और आगे की कार्रवाई पर फैसला होना बाकी है.
27 लाख की कमाई, 2.51 करोड़ का ट्रांजैक्शन... जांच में क्या-क्या मिला?
रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी अधिकारी अजित अमर, सारण जिले में सेकेंडरी एजुकेशन, प्लानिंग और अकाउंट्स के डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम ऑफिसर (DPO) हैं. पांच सदस्यीय जांच समिति ने उनकी आय, बैंक खातों और संपत्तियों की जांच की. जांच में सामने आया कि निगरानी की अवधि के दौरान अधिकारी और उनकी पत्नी के खातों से 2.51 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन हुआ. इतना ही नहीं, समिति ने यह भी पाया कि अधिकारी की पत्नी के नाम पर एकमा क्षेत्र में 120 कट्ठा जमीन खरीदी गई, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 41.5 लाख रुपये बताई गई है. इसके अलावा कई लाख रुपये की लागत से एक मकान बनने की भी जानकारी जांच रिपोर्ट में दर्ज है.
एक ठेकेदार की शिकायत से खुली पूरी कहानी
इस पूरे मामले की शुरुआत एक ठेकेदार की शिकायत से हुई। आरोप था कि सरकारी कार्य कराने के बदले अधिकारी ने कथित तौर पर रिश्वत की मांग की थी. शिकायत के बाद अधिकारियों ने बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति के दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन की जांच शुरू की. जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है कि अजित अमर, उनकी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों के बैंक खातों, संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच कराई जाए. साथ ही विभिन्न बैंकों और सरकारी विभागों से रिकॉर्ड जुटाकर यह पता लगाने की भी बात कही गई है कि इतनी बड़ी रकम का स्रोत क्या था.
अब बिहार सरकार के पाले में फैसला, होगी विभागीय कार्रवाई या कानूनी केस?
जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) ने पुष्टि की है कि जांच रिपोर्ट राज्य मुख्यालय भेज दी गई है. अब बिहार सरकार इस रिपोर्ट के आधार पर तय करेगी कि अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए, कानूनी केस दर्ज हो या किसी अन्य एजेंसी से विस्तृत जांच कराई जाए फिलहाल अधिकारी के खिलाफ आरोपों की जांच जारी है और अंतिम निर्णय सरकार की ओर से लिया जाना बाकी है. यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला बिहार में सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का एक बड़ा उदाहरण बन सकता है.

specializes in local and regional stories, bringing simple, factual, and timely updates to readers.




Leave a comment