बाबूलाल मरांडी के करीबियों को झारखंड भवन में नहीं मिला कमरा, नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा में उठाया मुद्दा
जुलाई महीने में सरकार ने एक आदेश जारी किया था कि दिल्ली स्थित नये झारखंड भवन में अब माननीयों की सिफारिश पर कमरा नहीं मिलेगा. ऑफिशियल और पर्सनल काम से दिल्ली जाने वाले लोग जो मंत्री, सांसद या विधायकों की सिफारिश पर झारखंड भवन में कमरा लेकर ठहरते थे उन्हें अब वहां कमरा नहीं मिलेगा.

Ranchi: जुलाई महीने में सरकार ने एक आदेश जारी किया था कि दिल्ली स्थित नये झारखंड भवन में अब माननीयों की सिफारिश पर कमरा नहीं मिलेगा. ऑफिशियल और पर्सनल काम से दिल्ली जाने वाले लोग जो मंत्री, सांसद या विधायकों की सिफारिश पर झारखंड भवन में कमरा लेकर ठहरते थे उन्हें अब वहां कमरा नहीं मिलेगा. सरकार के इस आदेश के बाद सिर्फ विधायकों के करीबी रिश्तेदारों को ही वहां कमरे मिल रहे हैं. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हाल ही में अपने कुछ समर्थकों को वहां ठहराने की कोशिश की थी, लेकिन कमरा नहीं मिला. बुधवार को बाबूलाल ने झारखंड विधानसभा में यह मामला उठाया. उन्होंने कहा कि इस आदेश को रद्द किया जाए. यह आदेश सिर्फ अफसरों पर लागू हो. विधायकों पर नहीं.
रामेश्वर उरांव का मामला भी उठा
उन्होंने कांग्रेस विधायक रामेश्वर उरांव के द्वारा आलोक दुबे और लाल किशोर नाथ शाहदेव को रिश्तेदार बताकर झारखंड भवन में ठहराने का भी मामला उठाया. बाबूलाल ने कहा कि झारखंड बवन अफसरों के बीबी-बच्चे, सास-ससुर और साले-सालियों के लिए नहीं है. मंत्रिमंडल निगरानी सचिवालय का फैसला कि केवल विधायकों के सगे संबंधी ही झारखंड भवन में रह सकते हैं, सही नहीं है. इसे अविलंब वापस लेना चाहिए.
ऊर्जा विभाग के गेस्ट हाउस में कोई ठहरा नहीं!
बाबूलाल मरांडी ने दिल्ली में ऊर्जा विभाग के गेस्ट हाउस का भी मामला उठाया. कहा कि स्थित ऊर्जा विभाग के गेस्ट के लिए हर महीने पांच लाख रुपए किराया दिया जाता है. इसमें आठ स्टॉफ और चार–पांच गाड़ियां भी हैं. यह बताया जाए कि इसमें आज तक कोई विधायक ठहरा है या नहीं. उन्होंने स्पीकर से झारखंड भवन और ऊर्जा विभाग के गेस्ट हाउस के 5 सालों का रजिस्टर मंगाने की मांग की है, ताकि पता चल सके कि वहां कौन-कौन ठहरा है. बाबूलाल ने कहा कि इसे कौन चला रहा है और कौन इसका इंचार्ज है. आवास कौन आवंटित करता है इसकी भी जांच होनी चाहिए. सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इसपर जवाब देते हुए कहा कि यह गंभीर विषय है. इस तरह का निर्णय कैबिनेट की स्वीकृति के बिना नहीं लिया जा सकता. सरकार इसपर समयक विचार करेगी.

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