अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: 45 दिन की CCTV फुटेज के बाद आरोपी से पूछताछ में कई अहम खुलासे
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस पूछताछ के दौरान 45 दिन की CCTV फुटेज के आधार पर आरोपी अविनाश शुक्ला से कई अहम जानकारियां सामने आई हैं. पुलिस अब चोरी की रकम, कथित नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन और अन्य आरोपियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है.

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी और चोरी के मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है. पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला से हुई पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं. जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी को मंदिर परिसर की करीब 45 दिनों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग दिखाई गई, जिसके बाद पूछताछ का रुख बदल गया. पुलिस का दावा है कि इसके बाद आरोपी ने कई ऐसे तथ्यों की जानकारी दी, जिनसे पूरे मामले की जांच को नई दिशा मिली है. शुरुआती जांच में चोरी की रकम के बंटवारे, कथित तौर पर उस धन से संपत्ति और वाहन खरीदने, सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ की कोशिश और आरोपियों की आपसी बैठकों जैसी बातें सामने आई हैं. हालांकि, मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस सभी दावों की पुष्टि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कर रही है.
CCTV फुटेज के बाद पूछताछ में मिले अहम सुराग
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, रिमांड के दौरान अविनाश शुक्ला से कई चरणों में पूछताछ की गई. इसी दौरान उसे मंदिर परिसर की लगभग 45 दिनों की सीसीटीवी फुटेज दिखाई गई. जांच एजेंसियों का कहना है कि रिकॉर्डिंग के आधार पर पूछताछ आगे बढ़ी और आरोपी से कई महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल हुईं. पुलिस अब इन तथ्यों का अन्य सबूतों के साथ मिलान कर रही है.
चोरी की रकम के बंटवारे का दावा
जांच के दौरान पुलिस को यह जानकारी भी मिली कि कथित तौर पर चढ़ावे से निकाली गई रकम आरोपियों के बीच बांटी जाती थी. सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में यह भी सामने आया कि समूह के कुछ सदस्य पूरे नेटवर्क में अधिक प्रभाव रखते थे और रकम के वितरण में उनकी अहम भूमिका थी. फिलहाल पुलिस इस आर्थिक लेनदेन की अलग से जांच कर रही है.
चोरी के पैसों से कार और संपत्ति खरीदने की जांच
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कथित चोरी की रकम का इस्तेमाल किन-किन कार्यों में किया गया. शुरुआती जांच में एक कार खरीदने और गांव में मकान निर्माण जैसी बातें सामने आई हैं. जांच एजेंसियां वाहन के स्वामित्व, बैंक लेनदेन और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच कर रही हैं ताकि धन के स्रोत और उपयोग की पुष्टि की जा सके.
CCTV सिस्टम से छेड़छाड़ की भी हो रही जांच
मामले की जांच में यह पहलू भी सामने आया है कि आरोपियों ने कथित तौर पर सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को प्रभावित करने की कोशिश की थी. पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या कंट्रोल रूम में जाकर फुटेज हटाने या रिकॉर्डिंग से छेड़छाड़ की गई थी. हालांकि, जांच एजेंसियों के अनुसार कई महत्वपूर्ण वीडियो रिकॉर्ड उनके पास सुरक्षित हैं, जिनकी फोरेंसिक जांच भी कराई जा रही है.
गुप्त बैठकों और पूरे नेटवर्क की जांच जारी
पुलिस अब इस पूरे मामले को केवल चोरी तक सीमित न मानकर एक संगठित नेटवर्क के रूप में भी जांच रही है. जांच में आरोपियों की आपसी बैठकों, संभावित साजिश और अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है. साथ ही सीसीटीवी फुटेज, वित्तीय रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है. पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

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