बल्ले से 8 रन, गेंद से 2 विकेट! वैभव सूर्यवंशी ने दलीप ट्रॉफी में दिखाया अपना दूसरा रूप
दलीप ट्रॉफी में 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने बल्ले से भले ही कमाल नहीं किया, लेकिन गेंद से शानदार प्रदर्शन कर सुर्खियां बटोर लीं. ईस्ट जोन की ओर से खेलते हुए वैभव ने महज 3 ओवर में 11 रन देकर 2 अहम विकेट झटके.

Duleep Trophy: दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन ने नॉर्थ ईस्ट जोन को पारी और 210 रनों के बड़े अंतर से हराकर सेमीफाइनल में जगह बना ली है. ईशान किशन की कप्तानी वाली ईस्ट जोन की इस शानदार जीत में 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने गेंद से खास छाप छोड़ी. विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए मशहूर वैभव इस मुकाबले में बल्ले से कुछ खास नहीं कर सके, लेकिन गेंदबाजी में उन्होंने कमाल कर दिया. बाएं हाथ के स्पिनर वैभव ने महज 3 ओवर में 11 रन देकर 2 महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए. उनकी गेंदबाजी ने न सिर्फ विरोधी टीम को मुश्किल में डाला, बल्कि कप्तान ईशान किशन के उस फैसले को भी सही साबित कर दिया, जिसमें उन्होंने मुश्किल समय में इस युवा खिलाड़ी को गेंद थमाई थी.
ईशान किशन ने रिस्क लेकर वैभव को थमाई गेंद
नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ मुकाबले में एक समय ईस्ट जोन के गेंदबाज विकेट के लिए संघर्ष कर रहे थे. विरोधी बल्लेबाज क्रीज पर टिके हुए थे और टीम को सफलता की जरूरत थी. ऐसे समय में कप्तान ईशान किशन ने 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को गेंद सौंपने का फैसला किया. यह फैसला थोड़ा जोखिम भरा माना जा रहा था, क्योंकि वैभव को मुख्य रूप से उनकी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाना जाता है. हालांकि, युवा खिलाड़ी ने कप्तान के भरोसे को तुरंत सही साबित किया. उन्होंने सिर्फ 3 ओवर की गेंदबाजी में 11 रन देकर 2 विकेट झटक लिए. वैभव की सटीक लाइन और लेंथ के सामने नॉर्थ ईस्ट जोन के बल्लेबाज दबाव में आ गए. इस प्रदर्शन के बाद वैभव ने बताया कि कप्तान ईशान किशन को उनकी विकेट लेने की क्षमता के बारे में शायद पूरी जानकारी नहीं थी.
'ईशान भैया को नहीं पता था कि मैं विकेट टेकर हूं'
मैच के बाद बीसीसीआई डोमेस्टिक की ओर से शेयर किए गए वीडियो में वैभव सूर्यवंशी ने अपनी गेंदबाजी को लेकर मजेदार खुलासा किया. उन्होंने बताया कि जब विरोधी टीम के विकेट नहीं गिर रहे थे, तब उन्हें 2-3 ओवर गेंदबाजी करने के लिए कहा गया. वैभव ने मजाकिया अंदाज में कहा कि ईशान भैया को लगा कि उन्हें गेंद देना एक रिस्क है, लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि वह विकेट टेकर गेंदबाज हैं. युवा खिलाड़ी के इस बयान ने उनके आत्मविश्वास को भी दिखाया. वैभव ने बताया कि उन्हें पहले से अंदाजा था कि उन्हें ज्यादा गेंदबाजी का मौका नहीं मिलेगा. इसलिए उन्होंने सीमित ओवरों में अपनी लाइन और लेंथ पर ध्यान केंद्रित किया. उनके इस छोटे लेकिन प्रभावी स्पेल ने मुकाबले का रुख बदलने में अहम भूमिका निभाई.
बल्ले से फ्लॉप, गेंद से सुपरहिट रहे वैभव
इस मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी का बल्ला उम्मीद के मुताबिक नहीं चला. उन्होंने सिर्फ 6 गेंदों का सामना किया और 8 रन बनाकर आउट हो गए. हालांकि, बल्लेबाजी में निराश करने के बाद उन्होंने गेंद से शानदार योगदान देकर इसकी भरपाई कर दी. वैभव ने कहा कि उन्हें पता था कि अगर वह 5 विकेट भी हासिल कर लें, तब भी शायद उन्हें सिर्फ 3 ओवर ही गेंदबाजी करने का मौका मिलेगा. इसलिए उन्होंने विकेट के पीछे भागने के बजाय अपनी लाइन और लेंथ पर फोकस किया. उनकी रणनीति कामयाब रही और उन्होंने महत्वपूर्ण मौकों पर दो विकेट हासिल किए. युवा खिलाड़ी के लिए यह प्रदर्शन इसलिए भी खास रहा क्योंकि उन्हें आमतौर पर विस्फोटक बल्लेबाज के तौर पर देखा जाता है. गेंद से इस तरह का प्रभाव छोड़कर वैभव ने अपनी ऑलराउंड क्षमता की झलक दिखाई.
3 ओवर में दो विकेट लेकर पलट दिया मैच
वैभव सूर्यवंशी ने नॉर्थ ईस्ट जोन की दूसरी पारी में दो अहम विकेट लेकर टीम को बड़ी सफलता दिलाई. उनकी गेंदबाजी के दौरान नॉर्थ ईस्ट जोन का स्कोर 75/5 से 79/7 हो गया. सबसे पहले वैभव ने किशन लिंगदोह को अपना शिकार बनाया. इसके बाद इमलीवती लेमतुर को विकेटकीपर के हाथों कैच कराकर पवेलियन भेज दिया. उनके लगातार दो विकेटों ने नॉर्थ ईस्ट जोन की पारी को पूरी तरह दबाव में डाल दिया. इससे पहले ईस्ट जोन ने अपनी पहली पारी में 467 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था. जवाब में नॉर्थ ईस्ट जोन की पहली पारी महज 111 रनों पर सिमट गई और टीम को फॉलोऑन खेलना पड़ा. दूसरी पारी में भी टीम ज्यादा देर टिक नहीं सकी और ईस्ट जोन ने मुकाबला पारी और 210 रनों से अपने नाम कर लिया.
रविवार को सेमीफाइनल में फिर नजर आएंगे वैभव
ईस्ट जोन की शानदार जीत के साथ टीम ने दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है. अब वैभव सूर्यवंशी के प्रदर्शन पर एक बार फिर सभी की नजरें रहेंगी. ईस्ट जोन का अगला मुकाबला रविवार को बेंगलुरु में सेंट्रल जोन के खिलाफ सेमीफाइनल में होगा. इस मैच में वैभव से बल्ले के साथ-साथ गेंद से भी योगदान की उम्मीद होगी. नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ भले ही उनका बल्ला नहीं चला, लेकिन गेंदबाजी में दो विकेट लेकर उन्होंने दिखा दिया कि वह जरूरत पड़ने पर टीम के लिए गेंद से भी उपयोगी साबित हो सकते हैं. 15 साल की उम्र में घरेलू क्रिकेट के बड़े मंच पर इस तरह का प्रदर्शन वैभव के बढ़ते कद को दर्शाता है. अब देखना होगा कि सेमीफाइनल में यह युवा खिलाड़ी किस अंदाज में अपना जलवा बिखेरता है.

