बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हिंसक हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. बीते तीन सप्ताह के भीतर अलग-अलग घटनाओं में कम से कम छह हिंदुओं की हत्या किए जाने की खबरें सामने आई हैं. विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि यूनुस सरकार इन घटनाओं को “छिटपुट हिंसा” बताकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत इसके उलट है.
ताजा मामला सोमवार का है, जब ढाका के बाहरी इलाके नरसिंदी जिले में एक हिंदू किराना दुकानदार की भीड़ द्वारा बेरहमी से हत्या कर दी गई. मृतक की पहचान 40 वर्षीय शरत चक्रवर्ती मणि के रूप में हुई है, जो पालाश उपजिला के चारसिंदुर बाजार में अपनी दुकान चलाते थे.
दुकान पर किया गया हमला, अस्पताल ले जाते समय मौत
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार रात अज्ञात हमलावरों ने शरत चक्रवर्ती मणि पर उनकी दुकान पर ही धारदार हथियारों से हमला कर दिया. हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए. स्थानीय लोगों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई.
साप्ताहिक पत्रिका वीकली ब्लिट्ज ने दावा किया है कि इस हत्या के पीछे कट्टरपंथी धार्मिक उग्रवादियों का हाथ हो सकता है. हालांकि, प्रशासन की ओर से अब तक आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की गई है.
फेसबुक पोस्ट को लेकर जांच
स्थानीय मीडिया के अनुसार, शरत चक्रवर्ती मणि ने 19 दिसंबर को फेसबुक पर एक पोस्ट साझा की थी, जिसमें उन्होंने देश में बढ़ती हिंसा पर चिंता जताई थी. पोस्ट में उन्होंने कथित तौर पर लिखा था कि उनकी जन्मभूमि “मौत की घाटी” बनती जा रही है. पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या यह सोशल मीडिया पोस्ट ही उनकी हत्या का कारण बनी.
एक अन्य हिंदू कारोबारी और पत्रकार की भी हत्या
इसी दिन बांग्लादेश के जेसोर जिले से भी एक और हत्या की खबर सामने आई. यहां 38 वर्षीय राणा प्रताप बैरागी की धारदार हथियारों से हमला कर हत्या कर दी गई. बांग्ला अखबार प्रथम आलो के अनुसार, बैरागी एक आइस फैक्ट्री के मालिक थे और ‘दैनिक बीडी खबर’ नामक अखबार के संपादक भी थे. हमलावरों की पहचान अब तक नहीं हो सकी है.
सरकार पर उठ रहे सवाल
लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. आलोचकों का कहना है कि सरकार कठोर कार्रवाई करने के बजाय मामलों को कमतर आंकने की कोशिश कर रही है, जिससे हिंसा करने वालों के हौसले बढ़ रहे हैं.

