झारखंड विधानसभा में गरमाया बालू का मुद्दा, विधायक-मंत्री में हुई तीखी बहस... बाबूलाल MBBS काउंसलिंग की CBI जांच की मांग पर अड़े

Ranchi: झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन विपक्ष ने सदन के बाहर और अंदर जबरदस्त हंगामा किया. झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगी परीक्षा में गड़बड़ी, अवैध बालू खनन, भ्रष्टाचार और अपराध के मुद्दे को लेकर बीजेपी विधायकों ने सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले विधानसभा के मुख्य द्वार पर धरना दिया. वहीं सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद यह मुद्दे सदन के अंदर भी गूंजे. सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने एमबीबीएस नामांकन में अनियमितता और मेडिकल काउंसलिंग में गड़बड़ी का मामला उठाया. बाबूलाल ने J.C.E.C.E.B पर मेडिकल काउंसलिंग कमिटी की गाइडलाइन का उल्लंघन करने का आरोप लगाया. उन्होंने सरकार से J.C.E.C.E.B के शीर्ष अधिकारियों को तत्काल हटाने, काउंसलिंग को रद्द और मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की.
वहीं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि मामला गंभीर है और बोर्ड स्तर पर जांच शुरू हो चुकी है. मंत्री ने कहा कि हम किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेंगे. जरूरत पड़ी तो केंद्रीय एजेंसी को शामिल किया जाएगा. उन्होंने राज्य के ट्रामा सेंटरों की स्थिति के बारे में भी सदन में विस्तार से बताया, कहा, राज्य में ट्रामा सेंटरों की रिपोर्ट मंगाई गई है. मैन पावर की कमी से कुछ केंद्र पूरी क्षमता से नहीं चल पा रहे. जल्द ही इन्हें संचालित करेंगे और नए ट्रामा सेंटर खोलेंगे.
उधर पांकी से बीजेपी के विधायक कुशवाहा शशि भूषण मेहता ने बालू का मामला उठाया. कहा कि पहले जहां 300 रुपये ट्रैक्टर बालू मिलता था, अब इसकी कीमत 7000 रुपये प्रति ट्रैक्टर हो गई है. राज्य में बालू उपलब्ध कराने का काम थाने को दे दिया गया है. थानेदार का काम लॉ एंड ऑर्डर का नहीं रह गया. बल्कि जितने भी बिचौलिए हैं, उनकी सूची बनाकर उनको बालू उपलब्ध कराने का रह गया है. उन्होंने सरकार से जानना चाहा कि क्या आसानी से कम दाम में बालू मिलेगी या इसी तरह से ब्लैक में लोगों को बालू लेकर अपना काम करना पड़ेगा..
मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कुशवाहा शशिभूषण मेहता के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि बालू घाटों की संचालन की व्यवस्था में एमडीओ के चयन से राज्य सरकार को नुकसान नहीं फायदा हुआ है. राज्य सरकार को एमडीओ को पैसे देना होता है. अगर कम दर में एमडीओ का चयन किया गया है तो इससे राज्य सरकार को नुकसान नहीं फायदा है. सवाल-जवाब के बीच सदन में विधायक और मंत्री के बीच जमकर बहस हुई. इस बहस में हटिया विधायक नवीन जायसवाल भी कूद पड़े. उन्होंने कहा कि मंत्री जी जवाब बहुत लच्छेदार ढंग से रख रहे हैं. लेकिन झारखंड की जनता को इससे कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा कि राज्य के किसी भी जिले या गांव में 100 रुपये सीएफटी बालू मुहैया नहीं होता है. उन्होंने 2025 के बालू घाटों की नीलामी की पॉलिसी पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि ऐसे नियम बनाए गए हैं कि नीलामी में कोई भी आम आदमी भाग नहीं ले सकता है. सिर्फ बाहर के लोग इसमें शामिल हो सकते हैं.

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