JPSC परीक्षा विवाद में एल खियांग्ते को झटका, कोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार
JPSC Case: 14वीं JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते को बड़ा झटका लगा है. CID की विशेष अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी. अब खियांग्ते को फिलहाल न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा .

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते को फिलहाल अदालत से राहत नहीं मिली है. सीआईडी की विशेष अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है. इससे पहले अदालत में बचाव पक्ष और जांच एजेंसी की ओर से जमानत को लेकर विस्तृत दलीलें रखी गई थीं. सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था, जिस पर अब निर्णय सुनाया गया है. खियांग्ते को सीआईडी ने 10 अगस्त को कथित परीक्षा अनियमितता मामले में गिरफ्तार किया था और पूछताछ के बाद से वह न्यायिक हिरासत में हैं. सीआईडी इस मामले में परीक्षा संचालन, निजी एजेंसी की भूमिका और कथित आर्थिक लेन-देन समेत कई पहलुओं की जांच कर रही है. वहीं बचाव पक्ष लगातार आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों को लेकर सवाल उठा रहा है. ऐसे में जमानत याचिका खारिज होना इस मामले की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है.
अदालत में बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?
जमानत पर सुनवाई के दौरान एल खियांग्ते की ओर से उनके वकीलों ने आरोपों को चुनौती देते हुए कहा कि उनके खिलाफ ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे सीधे तौर पर आपराधिक साजिश में उनकी भूमिका साबित हो.
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि जांच के दौरान उनके ठिकानों पर की गई तलाशी में ऐसी कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली, जो कथित अनियमितताओं में उनकी सीधी संलिप्तता को साबित करती हो.
वकीलों की ओर से अदालत से यह भी आग्रह किया गया कि जांच आगे चलने के दौरान उन्हें जमानत का लाभ दिया जाए. हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और जमानत याचिका खारिज कर दी.
CID ने खियांग्ते की भूमिका पर उठाए सवाल
दूसरी तरफ सीआईडी ने अदालत में जमानत का विरोध करते हुए जांच में सामने आए तथ्यों का हवाला दिया.
जांच एजेंसी के मुताबिक, परीक्षा आयोजित कराने के लिए ट्रिपल डी डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) को काम दिए जाने की प्रक्रिया में खियांग्ते की भूमिका की जांच की जा रही है. सीआईडी का आरोप है कि परीक्षा संचालन से जुड़े कई पहलुओं में पारदर्शिता को लेकर सवाल थे.
जांच एजेंसी की ओर से यह भी दावा किया गया है कि खियांग्ते और निजी कंपनी से जुड़े लोगों के बीच कथित आर्थिक लेन-देन के संकेत मिले हैं. इस मामले में सीआईडी को अब तक करोड़ों रुपये के कथित मनी ट्रेल की जानकारी मिलने की रिपोर्ट भी सामने आई है.
10 अगस्त को हुई थी गिरफ्तारी
एल खियांग्ते की गिरफ्तारी 10 अगस्त को हुई थी. इसके बाद सीआईडी ने उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ की और फिर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
खियांग्ते ने गिरफ्तारी से पहले 22 जुलाई को JPSC अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था. इससे पहले वह झारखंड के मुख्य सचिव भी रह चुके हैं.
सीआईडी की जांच अब सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है. एजेंसी परीक्षा संचालन से जुड़े अधिकारियों, निजी कंपनी के लोगों और अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है. रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में 20 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है.
JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच जारी
यह पूरा मामला JPSC की 14वीं परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है. जांच एजेंसी परीक्षा के संचालन, OMR से जुड़े मामलों और निजी एजेंसी की भूमिका समेत कई बिंदुओं पर जांच कर रही है.
हालिया जांच में कथित तौर पर कुछ अभ्यर्थियों के चयन और कमीशन से जुड़े दावे भी सामने आए हैं. सीआईडी की पूछताछ में TDPL से जुड़े एक अधिकारी के हवाले से 12 अभ्यर्थियों के चयन और कथित कमीशन की बात सामने आने की रिपोर्ट प्रकाशित हुई है. हालांकि इन दावों की अंतिम पुष्टि अदालत की प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों से ही होगी.
इसी मामले को लेकर अभ्यर्थियों और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं में भी लगातार नाराजगी देखने को मिली है.
जमानत खारिज, अब आगे क्या होगा?
सीआईडी की विशेष अदालत से जमानत नहीं मिलने के बाद एल खियांग्ते को फिलहाल न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा.
दूसरी तरफ जांच एजेंसी के लिए अब अगला बड़ा लक्ष्य कथित परीक्षा अनियमितता से जुड़े पूरे नेटवर्क और आर्थिक लेन-देन की कड़ियों को स्पष्ट करना होगा.
मामले में आगे की जांच से यह पता चलने की उम्मीद है कि परीक्षा संचालन में किन-किन लोगों की भूमिका थी और कथित अनियमितताओं से जुड़े आरोपों के पीछे कितने साक्ष्य मौजूद हैं.
फिलहाल अदालत के इस फैसले से एल खियांग्ते को तत्काल राहत नहीं मिली है, जबकि JPSC परीक्षा विवाद में सीआईडी की जांच लगातार आगे बढ़ रही है. अंतिम दोष या निर्दोषता का फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा.

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