‘यात्रा रोकिए मुख्यमंत्री जी’,पटना हॉस्टल मामलों पर रोहिणी आचार्य का तीखा हमला
बिहार की राजधानी पटना में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर हालिया घटनाओं ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है. एक के बाद एक गर्ल्स हॉस्टलों से सामने आ रही गंभीर और संदिग्ध घटनाओं ने कानून-व्यवस्था के दावों को कठघरे में खड़ा कर दिया है.


Patna: बिहार की राजधानी पटना में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर हालिया घटनाओं ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है. एक के बाद एक गर्ल्स हॉस्टलों से सामने आ रही गंभीर और संदिग्ध घटनाओं ने कानून-व्यवस्था के दावों को कठघरे में खड़ा कर दिया है. पहले शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की मौत और अब परफेक्ट गर्ल्स हॉस्टल में नाबालिग छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में जान जाने की खबर ने अभिभावकों, छात्रों और आम लोगों के बीच डर और आक्रोश पैदा कर दिया है. इन घटनाओं ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि बिहार की राजनीति को भी गर्मा दिया है. विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है और राजधानी में छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है. इन घटनाओं को लेकर राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की पुत्री रोहिणी आचार्य ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर सीधा हमला बोला है. उन्होंने मुख्यमंत्री की चल रही यात्राओं पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर बेहद सख्त टिप्पणी की.
रोहिणी आचार्य का ट्वीट:
“मुख्यमंत्री जी, यात्रा स्थगित करिए. आंखें खोलिए और देखिए कि कैसे आपके शासन में लगभग रोज बेटियां बलात्कारियों की शिकार बन रही हैं. राजधानी पटना में बेटियों की हत्या का सिलसिला बार-बार सामने आ रहा है. कुछ ही दिन पहले शंभू गर्ल्स हॉस्टल की घटना ने बिहार की अस्मिता को शर्मसार किया था और अब परफेक्ट गर्ल्स हॉस्टल की घटना ने पूरे राज्य को फिर जार-जार कर दिया है. सवाल आपसे है—क्या अब माता जानकी की जन्मभूमि कही जाने वाली बिहार में मां-बहन और बेटियों के लिए कोई सुरक्षा नहीं बची है? जिस व्यवस्था में बिना कानून, पुलिस और प्रशासन के डर के बेटियां दरिंदगी का शिकार हों, उस शासन को केवल धिक्कार है.”
शंभू से परफेक्ट हॉस्टल तक, घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
पटना के चित्रगुप्त नगर इलाके में स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल की घटना की जांच अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि परफेक्ट गर्ल्स हॉस्टल से सामने आई नई घटना ने हालात और गंभीर बना दिए. शंभू हॉस्टल मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यौन हिंसा की पुष्टि के बाद लोगों का भरोसा व्यवस्था से और कमजोर हुआ है. इन मामलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि निजी हॉस्टलों की निगरानी आखिर किसके जिम्मे है. छात्राएं और उनके अभिभावक आरोप लगा रहे हैं कि हॉस्टलों में न तो सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है और न ही प्रशासन की नियमित जांच दिखाई दे रही है. राजधानी में पढ़ाई के लिए आई छात्राओं के बीच असुरक्षा का माहौल लगातार गहराता जा रहा है.
सियासत गरम, कार्रवाई पर जनता की नजर
इन घटनाओं के बाद बिहार की राजनीति में तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है. विपक्ष जहां सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगा रहा है, वहीं आम लोग पुलिस और प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठन की बात कही है, लेकिन इससे लोगों का गुस्सा कम नहीं हुआ है. विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक निजी हॉस्टलों पर सख्त नियम, नियमित निरीक्षण और जवाबदेही तय नहीं की जाएगी, तब तक ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाना मुश्किल होगा. फिलहाल, पटना के गर्ल्स हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था राज्य की सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आ गई है.

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