झारखंड में ग्रामीण विकास पर सीएम हेमंत सख्त, गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा योजनाओं का लाभ
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक समयबद्ध तरीके से पहुंचना चाहिए.

Ranchi: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक समयबद्ध तरीके से पहुंचना चाहिए. झारखंड मंत्रालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने पंचायतों को ग्रामीण विकास की सबसे अहम कड़ी बताते हुए योजनाओं के पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया. बैठक में ग्रामीण आवास योजना, सखी मंडल, मनरेगा, बिरसा हरित ग्राम योजना, लिफ्ट इरीगेशन और महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी योजनाओं की विस्तार से समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आवासविहीन और जर्जर मकानों में रहने वाले परिवारों की पहचान कर उन्हें जल्द योजनाओं का लाभ दिया जाए. वहीं महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई कार्य योजनाओं पर भी जोर दिया गया.
ग्रामीण आवास योजनाओं में तेजी लाने का निर्देश
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने समीक्षा बैठक में अबुआ आवास योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर आवास योजना की प्रगति पर विशेष फोकस किया. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राज्य में ऐसे सभी पात्र परिवारों को चिन्हित किया जाए जो अब भी आवासविहीन हैं या मिट्टी और जर्जर मकानों में रहने को मजबूर हैं. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि तय लक्ष्य के अनुरूप समयबद्ध तरीके से आवास योजनाओं को पूरा किया जाए ताकि जरूरतमंद लोगों को जल्द राहत मिल सके. उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर निगरानी मजबूत की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी पात्र व्यक्ति का नाम सूची से छूटे नहीं. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनाए रखने और निर्माण कार्यों की नियमित समीक्षा करने को कहा. बैठक में ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह भी मौजूद थीं.
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने महिला स्वयं सहायता समूहों यानी सखी मंडलों की भूमिका को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया. उन्होंने झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) को राज्य में नए सखी मंडलों की संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया. अधिकारियों ने जानकारी दी कि 5 हजार नए सखी मंडल गठित करने की प्रक्रिया चल रही है, जिसके तहत करीब 60 हजार परिवारों को जोड़ा जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को केवल खेती तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें सोलर पावर उत्पादन, मधुमक्खी पालन, जूट प्रोसेसिंग और अन्य रोजगारपरक गतिविधियों से जोड़ा जाए. इसके लिए आधुनिक तकनीक और नवाचार आधारित प्रशिक्षण की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए. उन्होंने कहा कि महिला समूहों को बैंक लिंकेज से जोड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जाए. सरकार का लक्ष्य महिलाओं के समूहों को मजबूत करने के लिए बैंकों से 5 हजार करोड़ रुपये तक ऋण उपलब्ध कराना है.
पलाश मार्ट और महिला उत्पादों के लिए बाजार तैयार करने की योजना
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों के साथ-साथ दूसरे राज्यों में भी पलाश मार्ट जैसे बिक्री केंद्र स्थापित किए जाएं ताकि ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को व्यापक बाजार मिल सके. बैठक में अधिकारियों ने बताया कि कांके रोड, रांची में बन रहा नया पलाश मार्ट भवन अंतिम चरण में है. इसके अलावा इस वर्ष छह नए पलाश मार्ट खोलने का लक्ष्य रखा गया है और भविष्य में सभी जिलों में ऐसे केंद्र विकसित करने की योजना है. मुख्यमंत्री ने कहा कि हर जिले के उत्पादों की पहचान कर उन्हें मार्केटिंग से जोड़ा जाए ताकि महिलाओं की आय में वृद्धि हो सके और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत बने.
मनरेगा, जल संरक्षण और बिरसा हरित ग्राम योजना पर जोर
मुख्यमंत्री ने मनरेगा और बिरसा हरित ग्राम योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि बागवानी, जल संरक्षण और सिंचाई आधारित योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा रही हैं. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लिफ्ट इरीगेशन और वाटर मैनेजमेंट सिस्टम को पंचायत स्तर पर प्रभावी तरीके से लागू किया जाए. मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संचय वर्तमान समय की सबसे बड़ी जरूरत है और इसके लिए ग्रामीणों की भागीदारी जरूरी है. उन्होंने बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत किसानों को बागवानी के लिए प्रेरित करने और अधिक से अधिक ग्रामीणों को इससे जोड़ने का निर्देश दिया. अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में राज्य में करीब डेढ़ लाख एकड़ भूमि पर इस योजना के तहत कार्य चल रहा है और महिला लाभार्थियों की संख्या में भी वृद्धि हुई है.
कौशल विकास और रोजगार योजनाओं की भी हुई समीक्षा
बैठक में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना, बिरसा विशिष्ट जनजातीय विकास योजना, युवा कौशल योजना और वाटरशेड परियोजनाओं की भी समीक्षा की. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई जाए और ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से रोजगार से जोड़ा जाए. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं शुरू करना नहीं, बल्कि उनका प्रभाव गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है. बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, ग्रामीण विकास सचिव मनोज कुमार, मनरेगा आयुक्त मृत्युंजय कुमार वर्णवाल और जेएसएलपीएस के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी अनन्य मित्तल समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे.

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