डॉलर मजबूत, रुपया कमजोर... पहली बार 91 के नीचे क्लोजिंग से हड़कंप
भारतीय मुद्रा के इतिहास में मंगलवार का दिन बेहद अहम रहा जब रुपया पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91 के नीचे बंद हुआ। रुपया 23 पैसे टूटकर 91.01 के स्तर पर क्लोज हुआ, जो अब तक का इसका सर्वकालिक निचला स्तर है।

भारतीय मुद्रा के इतिहास में मंगलवार का दिन बेहद अहम रहा. पहली बार रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91 के नीचे क्लोजिंग देने में नाकाम रहा और 91.01 के स्तर पर बंद हुआ. यह रुपया का अब तक का ऑल-टाइम लो माना जा रहा है. लगातार दबाव में चल रही भारतीय करेंसी ने महज 5 कारोबारी सत्रों में करीब 1% की गिरावट दर्ज की है, जबकि पिछले 10 सत्रों में यह 90 से फिसलकर 91 के पार पहुंच चुकी है.
2025 में एशिया की सबसे कमजोर करेंसी बना रुपया
अगर पूरे साल की बात करें तो 2025 में अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 6% कमजोर हो चुका है. एशियाई मुद्राओं की तुलना करें तो यह प्रदर्शन सबसे खराब माना जा रहा है. जानकारों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर डॉलर में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद भी रुपये की गिरावट नहीं रुक पाना चिंता का विषय है.
ट्रेड डील की अनिश्चितता बना सबसे बड़ा कारण
फॉरेक्स मार्केट के जानकारों का कहना है कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर अनिश्चितता रुपये पर सबसे बड़ा दबाव बना रही है. खबरों के मुताबिक, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के नए व्यापार प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया, जिससे डील के अंतिम रूप लेने पर सवाल खड़े हो गए हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि डॉलर की लगातार खरीदारी और ट्रेड डील पर असमंजस की स्थिति के कारण रुपया नए निचले स्तर पर पहुंच गया है. जब तक किसी समझौते पर अंतिम मुहर नहीं लगती, तब तक रुपये पर दबाव बना रह सकता है.
RBI की चुप्पी और विदेशी पूंजी की बिकवाली
विशेषज्ञों का मानना है कि RBI के सक्रिय हस्तक्षेप के अभाव में विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रह सकती है. विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, सट्टेबाज लगातार डॉलर-रुपया जोड़ी को ऊपर ले जा रहे हैं. अगर यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले दिनों में रुपया 92 के स्तर को भी पार कर सकता है. अनुमान है कि निकट भविष्य में रुपया 90.75 से 91.25 के दायरे में उतार-चढ़ाव करता रह सकता है, लेकिन ट्रेंड फिलहाल कमजोर ही नजर आ रहा है.
ट्रेड डेफिसिट घटा, फिर भी नहीं मिला सहारा
दिलचस्प बात यह है कि नवंबर महीने में ट्रेड डेफिसिट में कमी आई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी नीचे हैं. आमतौर पर ये फैक्टर रुपये को सपोर्ट देते हैं, लेकिन इस बार इनका असर नहीं दिख रहा. यह साफ संकेत है कि बाजार फिलहाल मैक्रो फैक्टर्स से ज्यादा जियो-पॉलिटिकल और ट्रेड डील रिस्क पर फोकस कर रहा है.
शेयर बाजार पर दिखा असर, सेंटीमेंट बिगड़ा
रुपये की कमजोरी का असर शेयर बाजार पर भी साफ दिख रहा है. निफ्टी करीब 125 अंक फिसलकर 25,900 के आसपास कारोबार करता नजर आया, जबकि बैंक निफ्टी पर एक्सिस बैंक में गिरावट के कारण दबाव बढ़ा. मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बिकवाली देखने को मिली. चार दिन की तेजी के बाद मेटल शेयरों में मुनाफावसूली आई और मेटल इंडेक्स करीब डेढ़ फीसदी कमजोर रहा. IT, डिफेंस, कैपिटल मार्केट और प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में भी कमजोरी हावी रही.
चुनिंदा शेयरों में राहत, भारती एयरटेल चमका
कमजोर बाजार के बीच भारती एयरटेल में ब्रोकरेज की बुलिश रिपोर्ट के चलते खरीदारी देखने को मिली. मॉर्गन स्टैनली ने ओवरवेट रेटिंग के साथ 2435 रुपये का टारगेट दिया, जिसके बाद यह शेयर करीब 2% चढ़कर निफ्टी का टॉप गेनर बना. भारती हेक्साकॉम में भी मजबूती दर्ज की गई.

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