वंदे मातरम् गाने से सोनिया गांधी ने रोका? वायरल VIDEO पर कांग्रेस ने दी पूरी सफाई
वंदे मातरम् के दौरान सोनिया गांधी के एक इशारे पर सियासी विवाद खड़ा हो गया। BJP ने आरोप लगाया कि उन्होंने पूरा राष्ट्रगीत गाए जाने से रोकने का इशारा किया, जबकि कांग्रेस ने आरोप खारिज करते हुए कहा कि सोनिया गांधी पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी लाने को कह रही थीं।

New Delhi: 80वें स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में हुए कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम्’ को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया। बीजेपी की ओर से आरोप लगाया गया कि सोनिया गांधी ने राष्ट्रगीत का पूरा संस्करण गाए जाने पर आपत्ति जताई और उसे रोकने का इशारा किया। कांग्रेस ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण गाया गया और किसी ने इसे रोकने की कोशिश नहीं की। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सफाई दी कि सोनिया गांधी का इशारा राष्ट्रगीत को लेकर नहीं, बल्कि लंबे समय से खड़े कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी लाने को लेकर था। विवाद के बीच 2026 में लागू हुई नई सरकारी व्यवस्था भी चर्चा में है, जिसके तहत आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के छह छंदों को लेकर प्रोटोकॉल तय किया गया है।
कांग्रेस मुख्यालय में क्या हुआ, जिस पर शुरू हुआ विवाद?
दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने तिरंगा फहराया। कार्यक्रम में सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। ध्वजारोहण के बाद ‘वंदे मातरम्’ का गायन हुआ। इसी दौरान सामने आए वीडियो को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई। बीजेपी की ओर से दावा किया गया कि सोनिया गांधी ने राष्ट्रगीत के पूरे संस्करण को लेकर आपत्ति जताने का इशारा किया। वीडियो के कुछ हिस्सों को आधार बनाकर यह सवाल उठाया गया कि क्या कांग्रेस नेता पूर्ण ‘वंदे मातरम्’ के गायन के पक्ष में नहीं थीं। हालांकि, इस दावे की कांग्रेस ने तत्काल सफाई दी और कहा कि वीडियो को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है।
कांग्रेस का जवाब- ‘सोनिया गांधी गीत नहीं, खरगे के लिए कुर्सी मांग रही थीं’
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने विवाद पर कहा कि इंदिरा भवन में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण गाया गया और इसे रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई। उनके मुताबिक सोनिया गांधी काफी देर से खड़े पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी लाने को कह रही थीं। कांग्रेस नेता शकील अहमद ने भी यही बात कही कि पार्टी के कार्यक्रमों में पहले से ‘वंदे मातरम्’ के दो छंद गाए जाते रहे हैं, लेकिन इस बार छह छंदों वाला पूरा संस्करण गाया गया। इस तरह कांग्रेस ने बीजेपी के आरोप को राजनीतिक विवाद बताया है। दूसरी ओर, बीजेपी की तरफ से वीडियो को लेकर सवाल उठाए गए हैं। यानी फिलहाल इस पूरे मामले में दो अलग-अलग दावे सामने हैं और विवाद का केंद्र वही वीडियो है, जिसकी व्याख्या दोनों पक्ष अलग तरीके से कर रहे हैं।
आखिर छह छंदों वाला पूरा वंदे मातरम् क्यों चर्चा में है?
इस विवाद को समझने के लिए 2026 में बदले राष्ट्रगीत के आधिकारिक प्रोटोकॉल को समझना जरूरी है। गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी 2026 को ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इनमें कहा गया कि जब राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों एक ही आधिकारिक कार्यक्रम में हों, तो पहले ‘वंदे मातरम्’ का पूरा छह-छंद वाला आधिकारिक संस्करण प्रस्तुत किया जाएगा और उसके बाद ‘जन गण मन’ होगा। सरकार ने यह व्यवस्था राष्ट्रपति और राज्यपालों से जुड़े औपचारिक कार्यक्रमों, राष्ट्रीय ध्वज फहराने तथा कुछ अन्य सरकारी आयोजनों के लिए तय की है। आधिकारिक दिशानिर्देशों में यह भी कहा गया है कि राष्ट्रगीत के गायन के दौरान मौजूद लोगों को सावधान मुद्रा में खड़ा होना चाहिए। यही वजह है कि इस साल स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण पहले के मुकाबले ज्यादा प्रमुखता से दिखाई दिया।
लाल किले से लेकर कांग्रेस मुख्यालय तक, इस बार क्यों खास है राष्ट्रगीत?
2026 में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के कारण पूरे देश में सालभर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। संस्कृति मंत्रालय के मुताबिक 7 नवंबर 2025 से शुरू हुआ यह राष्ट्रव्यापी स्मरण समारोह 7 नवंबर 2026 तक चलेगा। सरकार ने इसे स्वतंत्रता आंदोलन में गीत की भूमिका और राष्ट्रीय एकता के संदर्भ से जोड़ा है। स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में भी इस बार ‘वंदे मातरम्’ को विशेष स्थान मिला। लाल किले के कार्यक्रम में पहली बार इसे राष्ट्रगान से पहले आधिकारिक तौर पर शामिल किया गया। आकाशवाणी ने भी मार्च 2026 से छह छंदों वाला नया आधिकारिक संस्करण प्रसारित करना शुरू किया। सरकारी जानकारी के मुताबिक इसकी अवधि करीब 3 मिनट 10 सेकंड है, जबकि स्वतंत्रता के बाद से नियमित प्रसारण में मुख्य रूप से दो छंदों वाला करीब 65 सेकंड का संस्करण इस्तेमाल होता रहा था।
‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस का पुराना रुख भी बना बहस का हिस्सा
पूरा राष्ट्रगीत गाए जाने का सवाल सिर्फ आज के कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक लंबा राजनीतिक और ऐतिहासिक संदर्भ भी है। ‘वंदे मातरम्’ के छह छंदों में से शुरुआती दो छंद लंबे समय से सार्वजनिक और राजनीतिक आयोजनों में ज्यादा इस्तेमाल होते रहे हैं। इतिहासकारों और राजनीतिक विश्लेषणों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व ने 1930 के दशक में सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए शुरुआती दो छंदों को प्राथमिकता दी थी। इसके पीछे गीत के बाद के हिस्सों में धार्मिक प्रतीकों के संदर्भ को लेकर उस दौर में उठी आपत्तियां भी एक कारण थीं। यही ऐतिहासिक पृष्ठभूमि आज की राजनीति में फिर चर्चा का विषय बन गई है। हालांकि कांग्रेस का मौजूदा दावा साफ है कि उसके दिल्ली मुख्यालय के कार्यक्रम में इस बार पूरा संस्करण गाया गया और उसे रोकने की कोशिश नहीं हुई।
अब कानून भी चर्चा में, ‘वंदे मातरम्’ को मिली राष्ट्रीय गान जैसी वैधानिक सुरक्षा
‘वंदे मातरम्’ को लेकर इस साल एक और बड़ा बदलाव हुआ है। संसद ने Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Act, 2026 के जरिए राष्ट्रगीत को भी 1971 के कानून के तहत वैधानिक संरक्षण के दायरे में ला दिया है। इसका उद्देश्य राष्ट्रगान के संबंध में पहले से लागू प्रावधानों को राष्ट्रगीत पर भी लागू करना है। कानून के तहत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को जानबूझकर रोकना या उसके गायन में बाधा डालना दंडनीय प्रावधान के दायरे में आता है। ऐसे अपराध में तीन साल तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। हालांकि, इस कानून का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति पर सिर्फ इसलिए कार्रवाई होगी क्योंकि उसने पूरा गीत नहीं गाया। कानूनी प्रावधान मुख्य रूप से जानबूझकर गायन रोकने या उसमें बाधा डालने से जुड़े हैं। इसी वजह से कांग्रेस मुख्यालय के कार्यक्रम में सोनिया गांधी के कथित इशारे को लेकर चल रही राजनीतिक बहस और कानून के वास्तविक प्रावधान—दोनों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
फिलहाल कांग्रेस ने सोनिया गांधी पर लगे आरोप को खारिज कर दिया है। बीजेपी का दावा वीडियो के आधार पर है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि इशारा खरगे के लिए कुर्सी मंगाने को लेकर था। इसलिए विवाद का अंतिम निष्कर्ष राजनीतिक दावों से नहीं, बल्कि पूरे वीडियो और कार्यक्रम के संदर्भ को देखने के बाद ही निकाला जा सकता है।

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