JPSC-JSSC विवाद पर कांग्रेस का दांव, K. राजू ने हेमंत सोरेन से की मुलाकात; छात्रों के दबाव के बीच गठबंधन की सियासत तेज
JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर झारखंड में जारी छात्र आंदोलन के बीच कांग्रेस ने हेमंत सोरेन सरकार पर समाधान के लिए दबाव बढ़ा दिया है. कांग्रेस प्रभारी K. राजू की मुख्यमंत्री से मुलाकात और राहुल गांधी की चिट्ठी के बाद मामला गठबंधन की राजनीति में भी अहम हो गया है.


Ranchi: झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब सिर्फ परीक्षा प्रक्रिया का विवाद नहीं रह गया है. 24 दिन से जारी आंदोलन, छात्रों की भूख हड़ताल और 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेराव के ऐलान के बीच कांग्रेस ने भी इसे राजनीतिक रूप से गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है. कांग्रेस प्रभारी K. राजू ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर छात्रों की मांगों के समाधान की अपील की. इसके बाद चार सदस्यीय समिति बनाई गई है, जिसमें कांग्रेस के मंत्री भी शामिल हैं. दिलचस्प यह है कि कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम में सरकार की सहयोगी होने के साथ-साथ छात्रों की आवाज बनने की कोशिश कर रही है. राहुल गांधी की ओर से मुख्यमंत्री को भेजी गई चिट्ठी ने इस मुद्दे को राज्य की गठबंधन राजनीति से निकालकर राष्ट्रीय कांग्रेस की राजनीति से भी जोड़ दिया है. ऐसे में JPSC-JSSC विवाद अब हेमंत सरकार के लिए प्रशासनिक चुनौती के साथ कांग्रेस के लिए राजनीतिक दबाव बनाने का भी मौका बन गया है.
JPSC-JSSC पर छात्रों का आंदोलन, कांग्रेस ने पकड़ा मुद्दा
छात्रों का आरोप है कि JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल हैं. आंदोलनकारी परीक्षा रद्द करने, निष्पक्ष जांच और भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं. कई दौर की बातचीत के बावजूद अब तक कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है. यही वजह है कि आंदोलन लगातार लंबा खिंच रहा है और छात्रों का रुख भी सख्त होता जा रहा है. कांग्रेस ने इसी असंतोष को राजनीतिक हस्तक्षेप का आधार बनाया है. K. राजू ने कहा कि छात्रों की समस्याओं का समाधान जल्द होना चाहिए और पार्टी उनके साथ खड़ी है. यानी कांग्रेस का संदेश दो स्तरों पर है—छात्रों को समर्थन और सरकार के भीतर समाधान के लिए दबाव.
हेमंत सरकार के लिए गठबंधन के भीतर से बढ़ा दबाव
K. राजू की मुख्यमंत्री से मुलाकात को सिर्फ एक राजनीतिक शिष्टाचार बैठक के तौर पर देखना मुश्किल है. कांग्रेस सरकार में साझेदार है, ऐसे में पार्टी का प्रभारी स्तर का हस्तक्षेप बताता है कि छात्र आंदोलन अब गठबंधन के लिए भी राजनीतिक चिंता बन चुका है. मुख्यमंत्री ने चार सदस्यीय समिति गठित की है. इसमें कांग्रेस के मंत्री भी शामिल हैं. समिति छात्रों से बातचीत कर उनकी मांगों और लंबित मामलों की स्थिति समझेगी. सरकार पहले भी छात्रों से संवाद की कोशिश कर चुकी है, लेकिन वार्ता निर्णायक नतीजे तक नहीं पहुंची है.
राहुल गांधी की चिट्ठी ने बढ़ाई राजनीतिक अहमियत
इस बीच राहुल गांधी की मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखी चिट्ठी ने पूरे मामले को और बड़ा राजनीतिक आयाम दे दिया है. राहुल ने छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन और उनकी मांगों को गंभीरता से लेने की अपील की है. कांग्रेस के लिए यह सिर्फ झारखंड के युवाओं का स्थानीय मुद्दा नहीं, बल्कि देशभर में भर्ती परीक्षाओं और युवाओं के रोजगार से जुड़ी राजनीति का हिस्सा है. यही वजह है कि K. राजू ने अपने बयान में JPSC-JSSC विवाद को व्यापक शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा सुधार से जोड़ने की कोशिश की. कांग्रेस इस मुद्दे पर बीजेपी के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर बनाए गए अपने नैरेटिव को झारखंड में भी स्थापित करना चाहती है.
20 अगस्त का अल्टीमेटम, अब सरकार की परीक्षा
फिलहाल सबसे बड़ा दबाव 20 अगस्त का है. छात्रों ने साफ कर दिया है कि मांगों पर समाधान नहीं निकला तो वे मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे. आंदोलनकारी JSSC-CGL और JPSC समेत संबंधित परीक्षाओं को लेकर रद्दीकरण, जांच और परीक्षा प्रक्रिया में सुधार जैसी मांगों पर अड़े हैं. ऐसे में कांग्रेस के सामने भी दोहरी चुनौती है. उसे छात्रों के साथ खड़ा दिखना है, लेकिन साथ ही उसी सरकार की जिम्मेदारी से भी बचना है, जिसमें वह सत्ता की साझेदार है. चार सदस्यीय समिति और राहुल गांधी की चिट्ठी के बाद अब असली परीक्षा सरकार की है—क्या बातचीत इस बार आंदोलन खत्म कराने लायक ठोस फैसले तक पहुंचती है, या 20 अगस्त का अल्टीमेटम गठबंधन की राजनीति पर भी दबाव बढ़ाएगा.

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