चाईबासा: पांच बच्चों को HIV संक्रमित रक्त चढ़ाने का मामला, हाईकोर्ट के आदेश पर FIR, जांच शुरू
चाईबासा सदर अस्पताल में थैलेसीमिया पीड़ित पांच मासूम बच्चों को HIV संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने के मामले में अब न्यायिक प्रक्रिया तेज हो गई है.

Chaibasa: चाईबासा सदर अस्पताल में थैलेसीमिया पीड़ित पांच मासूम बच्चों को HIV संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने के मामले में अब न्यायिक प्रक्रिया तेज हो गई है. झारखंड हाईकोर्ट के सख्त निर्देश के बाद चाईबासा सदर थाना में अस्पताल के ब्लड बैंक के तत्कालीन लैब टेक्नीशियन मनोज कुमार समेत अन्य कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है. यह गंभीर घटना पिछले वर्ष अक्टूबर की बताई जा रही है. चाईबासा सदर अस्पताल में 5 से 7 वर्ष आयु के पांच थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान HIV संक्रमित रक्त चढ़ा दिया गया था. बाद में जांच रिपोर्ट में सभी बच्चों के HIV पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई, जिससे पूरे जिले में हड़कंप मच गया था.
पीड़ित बच्चों के परिजनों ने आरोप लगाया था कि अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्त की जांच और स्क्रीनिंग प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती गई. इस मामले को लेकर झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति गौतम कुमार की अदालत में सुनवाई हुई, जहां इसे अत्यंत गंभीर करार दिया गया. अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया कि पीड़ित परिवार संबंधित थाने में शिकायत दर्ज कराएं और थाना प्रभारी तत्काल एफआईआर दर्ज करें. कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
हाईकोर्ट के आदेश के बाद पीड़ित बच्चों में से एक की मां के आवेदन पर चाईबासा सदर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई. सदर थाना प्रभारी तरुण कुमार ने बताया कि आवेदन में ब्लड बैंक द्वारा निर्धारित जांच मानकों का पालन नहीं करने की बात कही गई है, जिसके कारण संक्रमित रक्त बच्चों को चढ़ा और वे HIV पॉजिटिव हो गए. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
गौरतलब है कि घटना उजागर होने के बावजूद एफआईआर दर्ज करने में करीब चार महीने की देरी हुई थी, जिस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी भी जताई थी. मामले के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने प्रत्येक पीड़ित परिवार को 2-2 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की थी. साथ ही तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. सुशांतो कुमार मांझी को निलंबित कर दिया गया था, जबकि लैब टेक्नीशियन मनोज कुमार को सेवा से बर्खास्त किया गया.
घटना के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने चाईबासा पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की थी और उन्हें कड़ी कानूनी कार्रवाई व हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया था. वहीं, झारखंड बचाओ जनसंघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में परिजनों ने रांची में विधानसभा के सामने धरना भी दिया था. बाद में मोर्चा की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई, जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर अब जाकर एफआईआर दर्ज हो सकी है.

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