बिहार विधानसभा चुनाव के पहले फेज का नोटिफिकेशन आज जारी हो गया है, लेकिन अभी तक एनडीए और महागठबंधन के बीच सीट शेयरिंग फाइनल नहीं हुई है. दोनों ही गठबंधन के नेताओं की मीटिंग चल रही है. सूत्रों के मुताबिक एनडीए में सीटों के बंटवारे को लेकर चल रही बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय से मुलाकात के बाद चिराग पासवान ने कहा, 'सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत अंतिम दौर में है. हमलोग सब चीजें पहले ही क्लियर कर ले रहे हैं.' डिमांड माने जाने के सवाल पर चिराग ने कहा- 'जहां मेरे प्रधानमंत्री मोदी हैं, वहां कम से कम मुझे मेरे सम्मान के बारे में सोचने की जरूरत नहीं है. वहीं नित्यानंद राय ने कहा- जल्द ही सारी बातें फाइनल हो जाएंगी. उधर इंडिया महागठबंधन के सहयोगी दलों राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस, वामपंथी दल और वीआईपी के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर गतिरोध को समाप्त करने की कोशिश की जा रही है.
सम्मानजनक सीटों की उम्मीद कर रहे वामपंथी
सीपीआई-एम के सूत्रों के मुताबिक इंडिया ब्लॉक में भी सीट बंटवारे का फार्मूला तय हो गया है. सीपीआई (एम) नेताओं के एक दल जिसमें पार्टी महासचिव, दो पोलित ब्यूरो सदस्य, राज्य सचिव और केंद्रीय समिति के सदस्य (सीसीएम) ललन चौधरी, सीसीएम अवधेश कुमार और विधायक दल के नेता अजय कुमार ने गुरुवार को राजद नेता तेजस्वी यादव से मुलाकात की और सीट बंटवारे पर चर्चा की. सीट बंटवारे का फार्मूला जल्द ही अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है. सीपीआई के महासचिव डी राजा ने कहा है कि वामपंथी दल सम्मानजनक सीट बंटवारे के फार्मूले की उम्मीद कर रहे हैं.
कांग्रेस-राजद में इन 5 सीटों पर फंसा पेंच
बिहार चुनाव के लिए महागठबंधन में कई दौर की बैठकों के बाद भी राजद और कांग्रेस के बीच पांच सीटों पर असहमति के कारण सीट शेयरिंग पर बात नहीं बन पाई है. सूत्रों की मानें तो ये पांच सीटें- बैसी (पूर्णिया), बहादुरगंज (किशनगंज), रानीगंज (अररिया), कहलगांव (भागलपुर) और सहरसा हैं. 2020 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में राजद ने रानीगंज, सहरसा और बैसी से चुनाव लड़ा, जबकि कहलगांव और बहादुरगंज कांग्रेस के खाते में गए. इन सीटों पर दोनों ही दलों को हार का सामना करना पड़ा था. सूत्रों ने बताया कि राजद कांग्रेस से कहलगांव और बहादुरगंज सीट चाहती है जबकि कांग्रेस इनके बदले रानीगंज, सहरसा और बैसी की डिमांड कर रही है.





