संथाल परगना में बांग्लादेशी घुसपैठ पर बाबूलाल मरांडी का बड़ा हमला, अमित शाह से डिटेंशन सेंटर बनाने की मांग
संथाल परगना में कथित बांग्लादेशी घुसपैठ को लेकर बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से विशेष जांच अभियान चलाने, मतदाता सूची का पुनरीक्षण करने और कथित घुसपैठियों को रखने के लिए डिटेंशन सेंटर बनाने की मांग की है.

रांची: झारखंड के संथाल परगना में बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है. बीजेपी नेता और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संथाल परगना में बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें डिटेंशन सेंटर में रखने और कानूनी प्रक्रिया के तहत निर्वासन की कार्रवाई करने की मांग की है.
बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया है कि संथाल परगना के पाकुड़, साहिबगंज, राजमहल, लिट्टीपाड़ा, महेशपुर समेत कई इलाकों में बड़े पैमाने पर बांग्लादेशी घुसपैठ हो रही है. उनके मुताबिक, इसका असर इलाके की जनसांख्यिकी पर साफ दिखाई दे रहा है और आदिवासी आबादी का अनुपात लगातार कम हो रहा है.
मरांडी ने 2019 से 2024 के बीच के मतदाता आंकड़ों का हवाला देते हुए कई विधानसभा क्षेत्रों में एक खास वर्ग के मतदाताओं की बढ़ी संख्या पर सवाल उठाया है. उन्होंने बताया कि पाकुड़ में कुल मतदाताओं की संख्या 24 फीसदी बढ़ी, जबकि मुस्लिम मतदाताओं की संख्या में 40.9 फीसदी की वृद्धि हुई. बरहेट में मुस्लिम मतदाताओं की वृद्धि 40.3 फीसदी, नाला में 40.3 फीसदी और दुमका में 33.2 फीसदी बताई गई है.
इसी तरह लिट्टीपाड़ा में मुस्लिम मतदाताओं की वृद्धि 35.5 फीसदी, पोड़ैयाहाट में 34.3 फीसदी और गोड्डा में 24.1 फीसदी होने का दावा किया गया है. मरांडी ने इन आंकड़ों को संथाल परगना में तेजी से हो रहे जनसांख्यिकीय बदलाव से जोड़ते हुए इसकी गहन जांच की मांग की है.
बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसाने के लिए सरकारी जमीन, गोचर भूमि और आदिवासियों की जमीन पर कब्जा किया जा रहा है. उन्होंने फर्जी वंशावली, आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र के जरिए लोगों को स्थानीय नागरिक के तौर पर स्थापित करने का भी आरोप लगाया है.
उन्होंने केंद्र सरकार से संथाल परगना में विशेष जांच अभियान चलाने, पुराने खतियान और जमीन के रिकॉर्ड के आधार पर वंशावली की जांच कराने, मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण करने और फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है.
मरांडी ने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक संरक्षण के कारण घुसपैठ का यह नेटवर्क मजबूत हो रहा है. उन्होंने कहा कि अगर इस पर तत्काल रोक नहीं लगी तो संथाल परगना में आदिवासी समाज के सामने अपनी जमीन, पहचान और अस्तित्व बचाने का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है.

