अमेरिका की ओर से भारत समेत चीन पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी और भारत पर पहले से लागू 50 प्रतिशत टैरिफ के बीच भारतीय निर्यातकों को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. अमेरिकी बाजार में सामान भेजना महंगा होने से भारत के निर्यात पर असर पड़ा है. ऐसे समय में पड़ोसी देश चीन भारत के लिए एक बड़े वैकल्पिक बाजार के रूप में उभरा है और दोनों देशों के बीच व्यापार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
कॉमर्स मिनिस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से नवंबर की अवधि में भारत के कुल निर्यात में चीन का योगदान अकेले करीब 40 प्रतिशत रहा. जहां अमेरिका को होने वाले निर्यात में सुस्ती देखी गई, वहीं चीन को भारत का निर्यात तेजी से बढ़ा है. खासतौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स, समुद्री उत्पाद, पेट्रोकेमिकल और कृषि उत्पादों के निर्यात में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है.
चीन को निर्यात में 32.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी
फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से नवंबर के दौरान चीन को भारत का कुल निर्यात पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 32.8 प्रतिशत बढ़कर 12.22 अरब डॉलर पहुंच गया. जबकि इसी अवधि में भारत का कुल निर्यात केवल 2.6 प्रतिशत ही बढ़ा. इस दौरान भारत के कुल निर्यात में चीन की हिस्सेदारी बढ़कर 5.8 प्रतिशत हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले करीब 1 प्रतिशत अधिक है. अकेले नवंबर 2025 में चीन को निर्यात 90 प्रतिशत की छलांग लगाते हुए 2.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया.
समुद्री उत्पाद और टेलीकॉम उपकरणों में रिकॉर्ड वृद्धि
अप्रैल-अक्टूबर के दौरान चीन को समुद्री उत्पादों का निर्यात 1,307 प्रतिशत बढ़ा, जबकि टेलीकॉम उपकरणों के निर्यात में 469 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. अप्रैल-नवंबर के बीच समुद्री उत्पादों का कुल निर्यात 1.05 अरब डॉलर रहा. अगस्त से अक्टूबर 2025 के दौरान फ्रोजन झींगा मछली का निर्यात हर महीने 40 से 55 मिलियन डॉलर के बीच रहा.
इसी अवधि में ब्लैक टाइगर झींगा मछली का निर्यात पिछले साल की तुलना में 92.6 मिलियन डॉलर और वन्नामेई झींगा मछली का निर्यात 56.8 मिलियन डॉलर अधिक रहा. इसके अलावा लाइट नेफ्था की सप्लाई अप्रैल-अक्टूबर में 172 प्रतिशत बढ़कर 1,450 मिलियन डॉलर हो गई.
इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में बड़ा उछाल
इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भी भारत के निर्यात ने नया मुकाम हासिल किया. फ्लैट पैनल डिस्प्ले मॉड्यूल का निर्यात चीन के लिए इस साल शुरू हुआ और अप्रैल-अक्टूबर में यह 246.3 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह शून्य था. पॉपुलेटेड प्रिंटेड सर्किट बोर्ड का निर्यात 898 प्रतिशत बढ़कर 922.4 मिलियन डॉलर हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 23.9 मिलियन डॉलर था. वहीं टेलीफोनी से जुड़े अन्य इलेक्ट्रिकल उपकरणों के निर्यात में 189.5 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
कृषि और बेस मेटल निर्यात में भी तेजी
कृषि उत्पादों के निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली. अप्रैल-अक्टूबर के दौरान सूखी मिर्च के निर्यात में 105.4 मिलियन डॉलर, हरी मूंग में 77.2 मिलियन डॉलर और तेल-खली के अवशेषों में 102.8 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई. बेस मेटल सेक्टर में एल्यूमीनियम निर्यात 121.2 मिलियन डॉलर बढ़ा, जबकि रिफाइंड कॉपर बिलेट के निर्यात में 53.9 मिलियन डॉलर की तेजी आई.


