वेतन के इंतजार में 108 एंबुलेंस कर्मचारी, त्योहारों से पहले धरने पर बैठे कर्मी; स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
झारखंड में 108 एंबुलेंस कर्मचारी बकाया वेतन की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए हैं. त्योहारों से पहले वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों की आर्थिक परेशानी बढ़ गई है. कर्मचारियों ने स्वास्थ्य मंत्री के आश्वासन के बावजूद भुगतान नहीं होने का आरोप लगाया.

Report: Sanjay Munda
Ranchi: झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा से जुड़े कर्मचारी बकाया वेतन के भुगतान की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए हैं. झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ के सदस्यों का कहना है कि लंबे समय से वेतन नहीं मिलने के कारण उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. त्योहारों के नजदीक आने के बावजूद भुगतान नहीं होने से कर्मचारियों की परेशानी बढ़ गई है. कर्मचारियों ने स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी से मिले आश्वासन के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने की बात कही है. धरने के दौरान उन्होंने वेतन भुगतान के साथ-साथ एंबुलेंस की खराब स्थिति और 108 हेल्पलाइन पर कॉल नहीं लगने जैसी समस्याओं को भी उठाया.
लंबे समय से वेतन नहीं मिलने से आर्थिक संकट
धरने पर बैठे कर्मचारियों के मुताबिक, वेतन का भुगतान नहीं होने से उनके लिए घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है. कर्मचारियों का कहना है कि वे दिन-रात आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं, लेकिन समय पर वेतन नहीं मिलने से उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. एंबुलेंस कर्मचारी सरिता करकिट्टा ने अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि वह सदर अस्पताल में 108 एंबुलेंस सेवा में ड्यूटी करती हैं. उनके अनुसार, कमरे का किराया चार महीने से बकाया है. इसके अलावा बच्चों की हॉस्टल फीस और ट्यूशन फीस जैसी जिम्मेदारियों को पूरा करना भी चुनौती बन गया है. कर्मचारियों ने मांग की है कि उनके बकाया वेतन का जल्द भुगतान किया जाए, ताकि वे आर्थिक संकट से उबर सकें.
स्वास्थ्य मंत्री के आश्वासन के बाद भी नहीं हुआ भुगतान
कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्याओं को लेकर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी से कई बार मुलाकात की है. बातचीत के दौरान उन्हें बकाया वेतन के भुगतान और अन्य मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था. कर्मचारियों के मुताबिक, उन्हें 15 से 20 दिनों के भीतर समाधान होने की उम्मीद दी गई थी, लेकिन समय बीतने के बावजूद भुगतान नहीं हुआ. संघ के सदस्यों का दावा है कि करीब एक साल से उन्हें आश्वासन मिल रहा है, लेकिन वेतन की समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है. इससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है. उनका कहना है कि सरकार और संबंधित विभाग को मामले में गंभीरता दिखाते हुए जल्द निर्णय लेना चाहिए, ताकि कर्मचारियों को राहत मिल सके.
दिन-रात मरीजों की सेवा, फिर भी वेतन का इंतजार
108 एंबुलेंस सेवा आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस सेवा में तैनात कर्मचारियों को दिन और रात जरूरत के मुताबिक काम करना पड़ता है. दुर्घटना, अचानक तबीयत बिगड़ने या अन्य आपात स्थितियों में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने की जिम्मेदारी इन्हीं कर्मचारियों पर होती है. कर्मचारियों का कहना है कि स्वास्थ्य व्यवस्था में इतनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद उन्हें समय पर वेतन नहीं मिलना चिंताजनक है. उन्होंने संबंधित विभाग से मांग की है कि बकाया भुगतान की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और भविष्य में वेतन में देरी की समस्या दोबारा पैदा न हो. कर्मचारियों के अनुसार, आर्थिक असुरक्षा के बीच लगातार जिम्मेदारी निभाना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है.
धरने पर बैठे कर्मचारी, लेकिन मरीजों की सेवा जारी रखने का दावा
एंबुलेंस कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि उनका धरना बकाया वेतन और अपनी मांगों को लेकर है. उन्होंने कहा कि वे मरीजों को मिलने वाली आपातकालीन सेवा बाधित नहीं करना चाहते. कर्मचारियों के मुताबिक, एक एंबुलेंस से जुड़े चार कर्मचारियों में से दो धरने में शामिल हैं, जबकि अन्य दो ड्यूटी पर तैनात हैं. इस व्यवस्था के जरिए कर्मचारी अपनी मांगें उठाने के साथ मरीजों की सेवा जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं. उनका कहना है कि मरीजों की मदद करना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन इसके साथ कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करना भी जरूरी है. संघ ने सरकार और संबंधित एजेंसियों से जल्द बातचीत कर भुगतान की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है.
खराब एंबुलेंस और 108 हेल्पलाइन पर कॉल नहीं लगने की शिकायत
वेतन भुगतान के अलावा कर्मचारियों ने राज्य की आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ी कई समस्याएं भी उठाई हैं. उनका आरोप है कि कुछ एंबुलेंस खराब हालत में हैं, जिससे जरूरत पड़ने पर वाहन उपलब्ध कराने में परेशानी हो सकती है. कर्मचारियों के अनुसार, वाहनों की नियमित जांच और समय पर मरम्मत की व्यवस्था बेहतर किए जाने की जरूरत है. सरिता करकिट्टा ने यह भी शिकायत की कि कई बार 108 हेल्पलाइन पर कॉल करने के लिए सात से आठ बार या उससे भी अधिक प्रयास करना पड़ता है. उनके मुताबिक, ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से भी फोन नहीं लगने की शिकायतें सामने आती हैं. यदि आपात स्थिति में हेल्पलाइन तक संपर्क करने में देरी होती है, तो मरीजों को समय पर सहायता मिलने में परेशानी हो सकती है. हालांकि, इन शिकायतों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित विभाग का पक्ष सामने आना बाकी है.
बिना परिजन वाले मरीजों की मदद भी करते हैं कर्मचारी
कर्मचारियों ने बताया कि उनकी जिम्मेदारी केवल मरीजों को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाने तक सीमित नहीं रहती. कई बार ऐसे मरीज भी मिलते हैं, जिनके साथ कोई परिजन मौजूद नहीं होता. ऐसी परिस्थितियों में वे मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने तक सहयोग करते हैं. कर्मचारियों का कहना है कि वे अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए हरसंभव प्रयास करते हैं. हालांकि, अस्पताल पहुंचने के बाद मरीज के आगे के उपचार की जिम्मेदारी अस्पताल और संबंधित चिकित्सा कर्मियों की होती है. उन्होंने कहा कि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी बनाए रखने के लिए कर्मचारियों को समय पर वेतन, बेहतर वाहन और सुचारु हेल्पलाइन जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलना जरूरी है.
अब सवाल: 108 एंबुलेंस कर्मचारियों को कब मिलेगा बकाया वेतन?
झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ की प्रमुख मांग है कि कर्मचारियों के बकाया वेतन का जल्द भुगतान किया जाए और भविष्य में इस तरह की परेशानी से बचने के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए. इसके साथ ही खराब एंबुलेंस की मरम्मत, वाहनों की उपलब्धता और 108 हेल्पलाइन से जुड़ी शिकायतों की जांच करने की मांग भी उठाई गई है. आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में काम करने वाले कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा और संसाधनों की उपलब्धता सेवा की निरंतरता के लिए महत्वपूर्ण है. ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग कर्मचारियों की मांगों पर कब कार्रवाई करता है. कर्मचारियों को दिए गए आश्वासन पर अमल कब होगा और 108 एंबुलेंस सेवा से जुड़ी समस्याओं का समाधान किस तरह निकलेगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा.

