22 गांवों की आस्था का केंद्र है बधनी नावाडीह का दुबे स्थल, नम आंखों से मां दुर्गा को दी विदाई
देवघर के सारवां प्रखंड स्थित बधनी नावाडीह का दुबे स्थल 22 गांवों की आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहां सार्वजनिक वैष्णवी दुर्गा पूजा समिति की ओर से आयोजित पूजा के बाद द्वादशी तिथि पर मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया गया. स्व. रामेश्वर दुबे ने विशनपुर गढ़ से प्रतिमा लाकर पूजा की शुरुआत की थी.

Deoghar: सारवां प्रखंड के बधनी नावाडीह स्थित सार्वजनिक वैष्णवी दुर्गा पूजा समिति, दुबे स्थल पहाड़ी पर इस वर्ष भी 22 गांवों की सामूहिक आस्था के बीच मां दुर्गा की पूजा धूमधाम से संपन्न हुई. शुक्रवार को द्वादशी तिथि पर प्रतिमा विसर्जन के साथ मां को भावभीनी विदाई दी गई. इस दौरान श्रद्धालुओं की आंखें नम रहीं और वातावरण भक्तिमय बना रहा. यहां दुर्गापूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आसपास के 22 गांवों को जोड़ने वाली परंपरा है. समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, वर्षों से ग्रामीण मिलकर पूजा का आयोजन करते आ रहे हैं.
स्व. रामेश्वर दुबे ने शुरू की थी पूजा की परंपरा
समिति के अध्यक्ष संजय कुमार सिंह और उपाध्यक्ष गंगाधर वर्मा ने बताया कि दुबे स्थल पर दुर्गापूजा की शुरुआत लोहारडीह गांव निवासी स्व. रामेश्वर दुबे ने की थी. उन्होंने विशनपुर गढ़ से मां दुर्गा की प्रतिमा लाकर स्थापित की और गांव-गांव भिक्षाटन कर पूजा-अर्चना की परंपरा शुरू की. धीरे-धीरे यह आयोजन आसपास के गांवों की सामूहिक आस्था का केंद्र बन गया. वर्ष 2013 में रामेश्वर दुबे के निधन के बाद ग्रामीणों ने पूजा की जिम्मेदारी संभाली. 22 गांवों के लोगों ने समिति गठित कर आपसी सहयोग से इस धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया.
फूस की छावनी से भव्य मंदिर तक पहुंचा आयोजन
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि शुरुआती दौर में मां दुर्गा की पूजा फूस की छावनी में होती थी. समय के साथ ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग से यहां भव्य मंदिर का निर्माण हुआ, जो उनकी आस्था और एकजुटता का प्रतीक है. पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख के विधायक कोष से यहां रंगमंच का निर्माण भी कराया गया है. पूजा और मेले की व्यवस्था में समिति के सदस्यों के साथ पुलिस-प्रशासन की भूमिका रही. सचिव सुशील कुमार मिश्रा उर्फ लालू मिश्रा, कोषाध्यक्ष संजय यादव और व्यवस्था प्रभारी जितेंद्र प्रसाद सिंह सहित पूरी कमेटी आयोजन में सक्रिय रही. विसर्जन के साथ पूजा संपन्न हुई और श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष मां के पुनः आगमन की कामना की.

