प्रस्तावित रिम्स-2 के विरोध में तेज हुआ आंदोलन, 18 जुलाई को लोकभवन के सामने धरना देंगे ग्रामीण और समाजसेवी
रांची में प्रस्तावित रिम्स-2 के लिए चिन्हित जमीन के विरोध में ग्रामीणों और समाजसेवियों ने आंदोलन तेज कर दिया है. 18 जुलाई को लोकभवन के सामने धरना-प्रदर्शन होगा. साथ ही 15 सदस्यीय टीम राज्यभर में समर्थन जुटाएगी, जबकि रैयतों का अनिश्चितकालीन धरना भी जारी है.

रांची में प्रस्तावित रिम्स-2 (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान) के निर्माण को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है. परियोजना के लिए चिन्हित भूमि को लेकर स्थानीय ग्रामीणों, रैयतों और सामाजिक संगठनों का विरोध अब संगठित आंदोलन का रूप लेता दिख रहा है. आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी आपत्तियों और मांगों पर अब तक संतोषजनक पहल नहीं की गई है. इसी के मद्देनजर उन्होंने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है. आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाएंगे और जनसमर्थन भी जुटाएंगे. इस बीच प्रशासन की ओर से परियोजना क्षेत्र में चहारदीवारी निर्माण का कार्य जारी है, जबकि प्रभावित रैयत पिछले 21 जून से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं. उनका मुख्य आग्रह है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप करें और प्रभावित पक्षों से बातचीत कर समाधान का रास्ता निकालें.
18 जुलाई को लोकभवन के समक्ष होगा धरना-प्रदर्शन
रिम्स-2 के लिए प्रस्तावित भूमि का विरोध कर रहे ग्रामीणों और समाजसेवियों ने 18 जुलाई को लोकभवन के समक्ष धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है. आंदोलनकारियों का कहना है कि यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक होगा. इसके माध्यम से वे सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करना चाहते हैं. उनका कहना है कि जब तक उनकी बात नहीं सुनी जाती, तब तक आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा.
समर्थन जुटाने के लिए जिलों का दौरा करेगी 15 सदस्यीय टीम
आंदोलन को व्यापक स्वरूप देने के लिए 15 सदस्यीय टीम गठित की गई है. यह टीम राज्य के विभिन्न जिलों का दौरा कर लोगों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों से संपर्क करेगी. आंदोलन से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि अधिक से अधिक लोगों का समर्थन मिलेगा तो उनकी मांगों को मजबूती मिलेगी. टीम विभिन्न क्षेत्रों में बैठकें और संवाद कार्यक्रम भी आयोजित करेगी.
आदिवासी विधायकों से मुलाकात की तैयारी
आंदोलनकारी सभी आदिवासी विधायकों से मुलाकात कर इस मुद्दे पर समर्थन मांगने की तैयारी में हैं. उनका कहना है कि वे जनप्रतिनिधियों के सामने प्रभावित परिवारों की स्थिति और अपनी मांगों को विस्तार से रखेंगे. साथ ही, यदि किसी विधायक की ओर से समर्थन नहीं मिलता है तो उसके खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने की रणनीति भी तैयार की जा रही है.
चहारदीवारी निर्माण जारी, रैयतों का धरना भी लगातार जारी
विवाद के बीच परियोजना स्थल पर चहारदीवारी निर्माण का कार्य जारी रहने की जानकारी सामने आई है. दूसरी ओर, प्रभावित रैयत 21 जून से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं. उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार नहीं करती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा. धरनास्थल पर प्रतिदिन ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता भी पहुंचकर अपना समर्थन जता रहे हैं.
मुख्यमंत्री से वार्ता की मांग पर अड़े आंदोलनकारी
धरने पर बैठे रैयतों की प्रमुख मांग है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं इस पूरे मामले में हस्तक्षेप करें और प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता करें. उनका कहना है कि बातचीत के जरिए ही विवाद का स्थायी और स्वीकार्य समाधान निकल सकता है. आंदोलनकारी उम्मीद जता रहे हैं कि सरकार उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुनेगी और सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे का निर्णय लिया जाएगा.

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