केएन त्रिपाठी ने 28 पन्नों में दिया शोकॉज का जवाब, बोले- सरकार नहीं सुनती तो जनप्रतिनिधि क्या करे?
कांग्रेस के पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने पार्टी के शोकॉज का 28 पन्नों में जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि जब सरकार जनप्रतिनिधियों की बात नहीं सुनती, तो वे जनता की समस्याएं कैसे हल कराएं?

Ranchi: कांग्रेस के पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने पार्टी की ओर से जारी किए गए शोकॉज नोटिस का जवाब दे दिया है. उन्होंने करीब 28 पन्नों में अपना पक्ष रखते हुए जवाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश को सौंपा है. बताया जा रहा है कि अपने जवाब में त्रिपाठी ने सरकार और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद से जुड़े कई मुद्दे उठाए हैं. उन्होंने सिलसिलेवार तरीके से यह बताने की कोशिश की है कि अलग-अलग मौकों पर उन्होंने जनता से जुड़ी किन समस्याओं और मांगों को सरकार के सामने रखा, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी. त्रिपाठी का तर्क है कि जनप्रतिनिधि की पहली जिम्मेदारी जनता की समस्याओं का समाधान कराना है. ऐसे में यदि सरकार तक बात पहुंचाने के बाद भी समाधान नहीं होता, तो जनप्रतिनिधि के सामने अपनी बात रखने के अलावा विकल्प क्या रह जाता है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य पार्टी अनुशासन तोड़ना नहीं है. अब उनके जवाब के बाद कांग्रेस नेतृत्व के अगले कदम पर नजर है.
28 पन्नों में सिलसिलेवार रखा अपना पक्ष
केएन त्रिपाठी ने शोकॉज के जवाब में अपने पक्ष को विस्तार से रखा है. 28 पन्नों के जवाब में उन्होंने कथित तौर पर उन मुद्दों और मांगों का उल्लेख किया है, जिन्हें उन्होंने सरकार के समक्ष उठाया था. उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों की ओर से उठाए गए जनहित के विषयों पर कार्रवाई होना जरूरी है.
बोले- जनता की समस्या उठाना मेरी जिम्मेदारी
त्रिपाठी ने अपने जवाब में जनप्रतिनिधि की भूमिका को लेकर भी अपना पक्ष रखा है. उनका कहना है कि जनता ने उन्हें अपनी समस्याओं को सदन और सरकार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी है. ऐसे में जनता से जुड़े मुद्दों को उठाना उनकी प्राथमिकता है. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार जनप्रतिनिधियों की बात नहीं सुने, तो ऐसी स्थिति में वे क्या कदम उठाएं.
कानून व्यवस्था पर बयान के बाद मिला था नोटिस
दरअसल, डालटेनगंज में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केएन त्रिपाठी ने राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री के पास यदि ज्यादा जिम्मेदारियां हैं, तो गृह विभाग की जिम्मेदारी कैबिनेट के किसी दूसरे सक्षम मंत्री को दी जा सकती है. कांग्रेस ने उनके इस बयान को गठबंधन सरकार की छवि प्रभावित करने वाला मानते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा था.
कांग्रेस की बैठकों से पहले दिया जवाब
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, 5 अगस्त को विधानसभा के मानसून सत्र से पहले कांग्रेस विधायक दल की बैठक प्रस्तावित है. इसके बाद महागठबंधन के विधायकों की भी बैठक होगी. इन बैठकों में प्रदेश प्रभारी के. राजू के भी शामिल होने की जानकारी है. केएन त्रिपाठी इन बैठकों में मौजूद नहीं रहेंगे, लेकिन उनके शोकॉज के जवाब पर चर्चा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है.
अब कांग्रेस नेतृत्व के फैसले पर नजर
केएन त्रिपाठी ने अपने जवाब में यह भी साफ करने की कोशिश की है कि वह पार्टी अनुशासन में विश्वास रखते हैं. साथ ही उन्होंने संगठन के सामने यह सवाल रखा है कि यदि जनप्रतिनिधियों की बात सरकार तक पहुंचने के बाद भी नहीं सुनी जाती, तो पार्टी के स्तर पर जनता के बीच संगठन को मजबूत करना कैसे संभव होगा. अब कांग्रेस नेतृत्व को उनके जवाब का परीक्षण कर आगे की कार्रवाई पर फैसला लेना है.

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