धनबाद: बरवाअड्डा थाना विवाद में JLKM का बड़ा फैसला, दिलीप चौधरी JLKM से बाहर
बरवाअड्डा थाना विवाद में JLKM ने बड़ा एक्शन लेते हुए पार्टी कार्यकर्ता दिलीप चौधरी को अनुशासनहीनता के आरोप में निष्कासित कर दिया है. पार्टी का आरोप है कि उन्होंने जिला इकाई को जानकारी दिए बिना विधायक जयराम महतो को थाने बुलाया और सोशल मीडिया पर पुलिस मारपीट की अफवाह फैलाई.

Dhanbad: झारखंड के चर्चित बरवाअड्डा थाना प्रकरण में अब राजनीतिक कार्रवाई सामने आई है. विधायक जयराम महतो की पार्टी JLKM (झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा) ने पार्टी कार्यकर्ता दिलीप चौधरी को अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से निष्कासित कर दिया है. पार्टी के प्रधान महासचिव फरजान खान की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि दिलीप चौधरी ने जिला इकाई को जानकारी दिए बिना विधायक जयराम महतो को सीधे बरवाअड्डा थाना बुलाया था. आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से पुलिस द्वारा मारपीट किए जाने की अफवाह भी फैलाई, जिसके बाद थाने के बाहर बड़ी संख्या में लोग जुट गए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई.
जिला इकाई को सूचना दिए बिना उठाया कदम
JLKM के प्रधान महासचिव फरजान खान के मुताबिक, पार्टी के नियमानुसार थाना स्तर से जुड़े मामलों का निष्पादन जिला इकाई के माध्यम से किया जाना चाहिए. पार्टी का कहना है कि दिलीप चौधरी द्वारा तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, जिससे पार्टी की छवि प्रभावित हुई. इसी को अनुशासनहीनता मानते हुए पार्टी ने उनके खिलाफ कार्रवाई की और उन्हें तत्काल प्रभाव से संगठन से निष्कासित कर दिया.
क्या है बरवाअड्डा थाना विवाद?
बरवाअड्डा थाना क्षेत्र की बड़ा पिछरी पंचायत में मुखिया यशोदा देवी और JLKM नेता गणेश दास के बीच कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर से प्रमाणपत्र बनाने को लेकर विवाद हुआ था. पुलिस द्वारा गणेश दास को हिरासत में लिए जाने के बाद मामला बढ़ गया और थाने के बाहर समर्थकों की भीड़ जुट गई. इसी दौरान विधायक जयराम महतो भी बरवाअड्डा थाना पहुंचे थे. थाने में विधायक और थाना प्रभारी के बीच तीखी बहस होने की बात सामने आई. इसके बाद करीब दो मिनट का एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुआ.
ऑडियो क्लिप को लेकर जयराम महतो ने उठाए सवाल
ऑडियो वायरल होने के बाद विधायक जयराम महतो ने सवाल उठाया कि उनकी बातचीत करीब 11 मिनट की थी, फिर उसमें से केवल चुनिंदा हिस्सा ही सार्वजनिक क्यों किया गया. उन्होंने ऑडियो क्लिप के सामने आने के तरीके पर भी सवाल खड़े किए. अब दिलीप चौधरी के पार्टी से निष्कासन के बाद बरवाअड्डा थाना विवाद ने एक नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है. मामले को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है.


