बीजेपी में सीपी सिंह की अनदेखी? नितिन नवीन के स्वागत से प्रेस विज्ञप्ति तक, आखिर क्या है माजरा?
रांची में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के स्वागत कार्यक्रम के बाद वरिष्ठ नेता सीपी सिंह चर्चा में आ गए हैं. एयरपोर्ट पर स्वागत के दौरान उनकी मौजूदगी और प्रदेश बीजेपी की प्रेस विज्ञप्ति में नाम नहीं होने पर सवाल उठे.

Ranchi: बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन रांची आए, पार्टी के बड़े-बड़े नेता उनके स्वागत में जुटे, लेकिन झारखंड बीजेपी के वरिष्ठ नेता सीपी सिंह को लेकर एक अलग ही चर्चा शुरू हो गई. एयरपोर्ट पर स्वागत के दौरान सीपी सिंह बाहर खड़े रहे और कार्यक्रम खत्म होने के बाद प्रदेश बीजेपी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में उनका नाम भी नहीं दिखा. सूत्रों के मुताबिक, इसके बाद सीपी सिंह की ओर से मीडिया विभाग तक फोन पहुंचा और नाम शामिल नहीं होने पर सवाल किया गया. शनिवार को प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में जब उनसे इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “सीपी सिंह को बच्चा-बच्चा पहचानता है.” अब सवाल यह है कि क्या यह महज प्रेस विज्ञप्ति में हुई चूक है, या बीजेपी के भीतर सीपी सिंह की मौजूदा भूमिका को लेकर भी कुछ सवाल हैं?
एयरपोर्ट पर स्वागत, लेकिन सीपी सिंह को लेकर चर्चा क्यों?
शुक्रवार को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन रांची पहुंचे. उनके स्वागत के लिए आदित्य साहू, रघुवर दास समेत प्रदेश बीजेपी के कई बड़े नेता एयरपोर्ट पहुंचे थे. पार्टी के नेता और कार्यकर्ता अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्वागत में जुटे थे. इसी दौरान सीपी सिंह भी वहां मौजूद थे. बताया गया कि पार्टी के कई वरिष्ठ नेता एयरपोर्ट के अंदर चले गए, जबकि सीपी सिंह बाहर कार्यकर्ताओं की भीड़ के बीच खड़े रहे. इसके बाद उनकी मौजूदगी और स्वागत कार्यक्रम में उन्हें मिली तवज्जो को लेकर चर्चा शुरू हो गई. सीपी सिंह जैसे वरिष्ठ नेता को लेकर यह घटनाक्रम इसलिए चर्चा में आया, क्योंकि इसके बाद एक और मामला सामने आया.
प्रेस विज्ञप्ति में नाम नहीं, फिर मीडिया विभाग तक पहुंचा फोन!
राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्वागत कार्यक्रम के बाद प्रदेश बीजेपी कार्यालय की ओर से प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई. इसमें स्वागत कार्यक्रम में शामिल नेताओं और कार्यकर्ताओं के नाम दिए गए, लेकिन सीपी सिंह का नाम शामिल नहीं था. सूत्रों के मुताबिक, प्रेस विज्ञप्ति जारी होने के बाद सीपी सिंह की ओर से मीडिया विभाग तक फोन पहुंचा. सवाल यह था कि जब वह भी राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्वागत के लिए पहुंचे थे, तो उनका नाम सूची में क्यों नहीं शामिल किया गया? अब यह नाम छूटने की सामान्य चूक थी या इसके पीछे कोई दूसरी वजह थी?
“सीपी सिंह को बच्चा-बच्चा पहचानता है”, क्या था पूरा मामला?
शनिवार को बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति की बैठक आयोजित हुई. पार्टी के तमाम नेता और कार्यकर्ता बैठक में पहुंचे. सीपी सिंह करीब ढाई बजे पहुंचे. इसी दौरान उनसे राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्वागत कार्यक्रम और प्रेस विज्ञप्ति में नाम नहीं होने को लेकर सवाल किया गया. इस पर सीपी सिंह ने कहा, “सीपी सिंह को बच्चा-बच्चा पहचानता है.” उनका यह जवाब अब चर्चा का हिस्सा है. एक तरफ वह अपनी पहचान का भरोसा जता रहे हैं, दूसरी तरफ प्रेस विज्ञप्ति में नाम नहीं होने की घटना ने उनकी संगठनात्मक भूमिका को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.
1996 से लगातार जीत, फिर संगठन में क्या है सीपी सिंह की भूमिका?
सीपी सिंह 1996 से रांची विधानसभा सीट से चुनाव जीतते आ रहे हैं. वह राज्य सरकार में मंत्री रहे हैं और झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं. बीजेपी के पुराने और अनुभवी नेताओं में उनकी गिनती होती है. लेकिन चुनावी जीत और संगठन में जिम्मेदारी दो अलग-अलग चीजें हैं. सीपी सिंह की राजनीतिक पहचान मजबूत रही है, मगर प्रदेश संगठन में उनकी मौजूदा भूमिका और सक्रियता को लेकर सवाल उठ रहे हैं. उनकी राजनीति का प्रमुख केंद्र रांची विधानसभा क्षेत्र रहा है, जबकि संगठन में किसी बड़ी जिम्मेदारी को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं है. ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या पार्टी के भीतर पुराने नेताओं की भूमिका बदल रही है? हालांकि, केवल एक प्रेस विज्ञप्ति में नाम नहीं होने से यह साबित नहीं होता कि सीपी सिंह को संगठन में दरकिनार किया जा रहा है.
क्या बीजेपी में पुराने दिग्गजों की अहमियत बदल रही है?
सीपी सिंह से जुड़ा यह घटनाक्रम ऐसे समय में चर्चा में आया है, जब बीजेपी के प्रदेश संगठन में अलग-अलग स्तरों पर गतिविधियां चल रही हैं. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का दौरा और प्रदेश कार्यसमिति की बैठक जैसे कार्यक्रम संगठन की प्राथमिकताओं को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण होते हैं. ऐसे कार्यक्रमों में नेताओं की मौजूदगी, उन्हें मिलने वाली जिम्मेदारी और पार्टी के आधिकारिक संचार में उनकी भूमिका पर राजनीतिक नजर रहती है. सीपी सिंह के मामले में भी यही हो रहा है.
सबसे बड़ा सवाल यही है—सीपी सिंह को बच्चा-बच्चा पहचानता है, लेकिन क्या बीजेपी संगठन में उन्हें आज भी पहले जैसी तवज्जो मिल रही है? इसका जवाब किसी एक घटना से नहीं, बल्कि आने वाले समय में पार्टी के कार्यक्रमों और संगठन में उनकी भूमिका से ही स्पष्ट होगा.



