IRCTC घोटाले से जुड़े मामले में बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को दिल्ली हाईकोर्ट से आंशिक राहत मिली है. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा उनके खिलाफ आरोप तय किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को नोटिस जारी किया है.
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की एकल पीठ ने याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए CBI से जवाब मांगा है. राबड़ी देवी ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोप तय किए गए थे.
गौरतलब है कि 13 अक्टूबर 2023 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव के खिलाफ IPC की धारा 120बी (आपराधिक साजिश) समेत अन्य धाराओं और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13(2) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था.
IRCTC घोटाले में आरोप तय करने के आदेश को लालू प्रसाद यादव पहले ही दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दे चुके हैं. इस मामले में CBI ने अपनी चार्जशीट में लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव सहित कई अन्य लोगों को आरोपी बनाया है.
यह मामला IRCTC के दो होटलों—रांची स्थित बीएनआर होटल और पुरी होटल—के टेंडर में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है. आरोप है कि इन होटलों के संचालन के लिए जारी टेंडर में नियमों की अनदेखी की गई और लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से होटल का आवंटन किया गया. इसी आधार पर राउज एवेन्यू कोर्ट ने सभी आरोपियों को समन जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा था.
क्या है IRCTC घोटाला?
सीबीआई के अनुसार, लालू प्रसाद यादव ने वर्ष 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री रहते हुए रेलवे के स्वामित्व वाले दो होटलों को IRCTC को स्थानांतरित किया. इसके बाद रांची और पुरी स्थित इन होटलों के रखरखाव के लिए टेंडर जारी किए गए, जिनका आवंटन कथित तौर पर कोचर बंधुओं की कंपनी सुजाता होटल को किया गया. जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ और इसके बदले लालू यादव के परिवार को अनुचित लाभ पहुंचाया गया.
इससे पहले 28 जनवरी 2019 को ट्रायल कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को एक-एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर नियमित जमानत दी थी. वहीं, 19 जनवरी 2019 को सीबीआई केस में भी लालू यादव को जमानत मिल चुकी है.
ईडी ने इस मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव सहित कुल 16 लोगों को आरोपी बनाया है, जिनमें कई निजी कंपनियां और व्यवसायी भी शामिल हैं. फिलहाल, दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित याचिकाओं पर आगे की सुनवाई के बाद ही यह तय होगा कि आरोप तय करने का आदेश बरकरार रहेगा या नहीं.

