हेमंत सोरेन ने विमला प्रधान को दी श्रद्धांजलि, आज रांची में अंतिम दर्शन, कल सिमडेगा में अंतिम संस्कार
“रांची में झारखंड की पूर्व मंत्री और सिमडेगा की पूर्व विधायक विमला प्रधान के निधन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनके आवास पहुंचकर पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित किया और परिजनों से मिलकर संवेदना व्यक्त की. भाजपा प्रदेश कार्यालय में भी पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी.”

Ranchi: झारखंड की पूर्व मंत्री और सिमडेगा की पूर्व विधायक विमला प्रधान के निधन के बाद शनिवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन उनके रांची स्थित आवास पहुंचे और पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. लोअर करमटोली, रोड नंबर-2 स्थित आवास पर मुख्यमंत्री ने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात की और अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें ढांढस बंधाया. हेमंत सोरेन ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में विमला प्रधान का योगदान और जनता के प्रति उनका समर्पण हमेशा याद किया जाएगा. उन्होंने सिमडेगा समेत पूरे झारखंड के विकास में उनकी भूमिका को याद करते हुए उनके निधन को राज्य की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया. मुख्यमंत्री ने मरांग बुरु से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और परिजनों, समर्थकों व प्रशंसकों को इस दुख को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की.
भाजपा कार्यालय में अंतिम दर्शन, नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
विमला प्रधान के निधन के बाद शनिवार को रांची में उनके अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि का कार्यक्रम रखा गया. सुबह उनके रांची स्थित आवास से पार्थिव शरीर को भाजपा प्रदेश कार्यालय ले जाया गया, जहां पार्टी के पदाधिकारियों, नेताओं, कार्यकर्ताओं, समर्थकों और शुभचिंतकों ने उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, अर्जुन मुंडा और चंपाई सोरेन समेत कई नेताओं ने उनके निधन पर शोक जताया. केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी और केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने भी उनके सार्वजनिक जीवन और सामाजिक योगदान को याद किया. राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि विमला प्रधान का निधन दुखद है. अलग-अलग नेताओं ने उनके लंबे राजनीतिक जीवन, संगठन के प्रति सक्रियता और समाज के लिए किए गए कामों को याद किया.
रांची से सिमडेगा पहुंचा पार्थिव शरीर, आवास पर होगा अंतिम दर्शन
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद विमला प्रधान का पार्थिव शरीर रांची से सिमडेगा ले जाया गया. तय कार्यक्रम के अनुसार शनिवार को सिमडेगा स्थित उनके आवास पर भी पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जहां स्थानीय लोग, समर्थक, पार्टी कार्यकर्ता और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे सकें. उनके निधन की खबर के बाद से ही सिमडेगा में राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था. लंबे समय तक सिमडेगा विधानसभा का प्रतिनिधित्व करने के कारण क्षेत्र में उनका व्यापक राजनीतिक और सामाजिक संपर्क रहा. उनके अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की तैयारी की गई. पार्टी और परिवार की ओर से समर्थकों तथा आम लोगों से अंतिम दर्शन और अंतिम यात्रा में शामिल होने की अपील की गई है.
रविवार सुबह निकलेगी अंतिम यात्रा, बगडांड घाट पर अंतिम संस्कार
विमला प्रधान की अंतिम यात्रा रविवार सुबह 9 बजे सिमडेगा स्थित आवास से निकलेगी. इसके बाद पार्थिव शरीर को बगडांड घाट ले जाया जाएगा, जहां अंतिम संस्कार किया जाएगा. अंतिम यात्रा में परिवार के सदस्यों के साथ भाजपा के नेता, कार्यकर्ता, समर्थक और सिमडेगा के आम लोग शामिल होंगे. उनके लंबे राजनीतिक जीवन को देखते हुए अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है. विमला प्रधान ने सिमडेगा की राजनीति में करीब एक दशक तक सक्रिय भूमिका निभाई और 2009 तथा 2014 में विधानसभा चुनाव जीतकर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया. इसलिए उनके निधन के बाद सिमडेगा में राजनीतिक शोक के साथ-साथ व्यक्तिगत स्तर पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने संवेदना व्यक्त की है. अंतिम संस्कार से पहले उनके आवास पर लोगों को अंतिम दर्शन का अवसर मिलेगा.
शुक्रवार रात 8:40 बजे अस्पताल में हुआ निधन
विमला प्रधान का निधन शुक्रवार रात करीब 8:40 बजे रांची के सैमफोर्ड अस्पताल में इलाज के दौरान हुआ. वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं और तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इलाज के दौरान उनकी स्थिति गंभीर हुई और शुक्रवार रात उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर सामने आते ही सिमडेगा सहित झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में शोक की प्रतिक्रिया सामने आने लगी. भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके निधन पर संवेदना व्यक्त की. राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने भी उनके निधन को दुखद बताते हुए सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान को याद किया. समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट में उनकी उम्र 69 वर्ष बताई गई है.
कौन थीं विमला प्रधान, कैसे शुरू हुआ राजनीतिक सफर
विमला प्रधान की पहचान झारखंड की वरिष्ठ भाजपा नेत्री, पूर्व मंत्री और सिमडेगा की पूर्व विधायक के रूप में रही. राजनीति में आने से पहले वह सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी थीं और अलग-अलग सामाजिक संस्थाओं के साथ काम करती रहीं. सामाजिक सरोकारों के जरिए क्षेत्र में उनकी सक्रियता बढ़ी और बाद में उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा. राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों के साथ उन्हें हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड में अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी मिली. क्षेत्र में उनकी सक्रियता केवल राजनीति तक सीमित नहीं रही. सामाजिक, सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों से जुड़े कार्यक्रमों में भी उनकी भागीदारी रही. सिमडेगा में उनकी राजनीतिक पहचान खास तौर पर महिला नेतृत्व और लंबे समय तक विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली नेता के रूप में बनी. इसी वजह से उनके निधन के बाद राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों की ओर से भी शोक जताया गया.
2009 में पहली बार जीता चुनाव, 2014 में फिर बनीं विधायक
विमला प्रधान ने 2009 के विधानसभा चुनाव में सिमडेगा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया. इसके बाद 2014 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने फिर इसी सीट से जीत दर्ज की और लगातार दूसरी बार विधायक बनीं. इस तरह 2009 से 2019 तक वह सिमडेगा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती रहीं. विधायक के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान उन्हें झारखंड सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली. उन्होंने समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास और पर्यटन जैसे विभाग संभाले. इस दौरान राज्य सरकार में मंत्री के तौर पर भी उनकी सक्रिय भूमिका रही. वर्ष 2017 में उन्हें विधानसभा में उनके प्रदर्शन के लिए ‘उत्कृष्ट विधायक’ सम्मान दिया गया. करीब दस वर्षों तक विधानसभा में रहने के दौरान सिमडेगा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को उठाना उनके राजनीतिक सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा.
2019 के बाद भी सिमडेगा से जुड़ा रहा नाता
2019 के विधानसभा चुनाव के बाद विमला प्रधान विधानसभा में नहीं रहीं, लेकिन सिमडेगा और भाजपा संगठन से उनका जुड़ाव बना रहा. करीब एक दशक तक विधायक रहने के कारण क्षेत्र में उनकी राजनीतिक और सामाजिक पहचान मजबूत रही. सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह अलग होने के बजाय वह सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहीं. सिमडेगा में उनकी मौजूदगी केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं थी. सामाजिक, सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों से जुड़े कार्यक्रमों में भी उनकी भागीदारी रही. उनके निधन के बाद सामने आई प्रतिक्रियाओं में नेताओं और समर्थकों ने उनके इसी लंबे सार्वजनिक जीवन को याद किया. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी उनके निधन को झारखंड की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया. भाजपा नेताओं ने संगठन और समाज के प्रति उनकी सक्रियता को याद किया. इस तरह विमला प्रधान का राजनीतिक सफर एक विधायक और मंत्री की भूमिका से आगे बढ़कर सिमडेगा के सार्वजनिक जीवन से लंबे जुड़ाव की कहानी रहा.


