देवघर में 5.60 लाख की लूट का दावा निकला झूठा, CCTV से खुली पोल
देवघर में 5.60 लाख रुपये की लूट का मामला फर्जी निकला. पुलिस के मुताबिक, कर्ज और महाजनों के तकादे से परेशान कपड़ा कारोबारी राजेंद्र मंडल ने झूठी लूट की कहानी रची थी.

Deoghar: झारखंड के देवघर में 5.60 लाख रुपये की कथित लूट का मामला पुलिस जांच में फर्जी निकला. पुलिस के अनुसार, कर्ज और महाजनों के लगातार तकादे से परेशान कपड़ा कारोबारी राजेंद्र मंडल ने लूट की झूठी कहानी रची थी. उसने दावा किया था कि दुर्गापूजा में हुई बिक्री की रकम बैंक में जमा करने जाते समय बदमाशों ने हथियार के बल पर पैसे लूट लिए. हालांकि, घटनास्थल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज की जांच तथा पूछताछ में उसकी कहानी की पोल खुल गई. पुलिस ने महज चार घंटे में मामले का खुलासा कर दिया.
कर्ज के दबाव में कारोबारी ने रची लूट की कहानी
पुलिस के मुताबिक, राजेंद्र मंडल देवघर जिले के कुंडा थाना क्षेत्र के नावाडीह गांव का निवासी है. बलियाचौकी में उसकी राजेंद्र वस्त्रालय नाम से कपड़े की दुकान है. कारोबारी ने शुक्रवार को पुलिस को सूचना दी कि वह दुर्गापूजा के दौरान हुई बिक्री के 5.60 लाख रुपये केनरा बैंक में जमा करने जा रहा था. इसी दौरान देवघर-सारवां रोड पर घोरपरास जंगल के आगे निर्माणाधीन और बंद पड़े पेट्रोल पंप के समीप कथित रूप से उसके साथ लूटपाट हुई. उसने बताया कि दो मोटरसाइकिलों पर सवार तीन बदमाशों ने उसे घेर लिया और रुपये लेकर फरार हो गए.
अपाची और पल्सर बाइक पर सवार बदमाशों का दावा
राजेंद्र मंडल ने पुलिस को बताया था कि कथित वारदात के दौरान एक बदमाश के पास पिस्टल थी. आरोप के अनुसार, बदमाशों ने उसे चकमा देकर गिरा दिया और उसके पास मौजूद 5.60 लाख रुपये लूट लिए. कारोबारी ने यह भी दावा किया कि बदमाश अपाची और पल्सर मोटरसाइकिलों पर सवार थे. घटना के बाद अपाची सवार बदमाश सारवां की ओर, जबकि पल्सर सवार बदमाश देवघर की दिशा में भाग निकले. दिनदहाड़े इतनी बड़ी रकम की लूट की सूचना मिलने के बाद पुलिस सक्रिय हुई और मामले की जांच शुरू कर दी.
सीसीटीवी फुटेज में नहीं मिला कथित लूट का सुराग
मामले की जांच के लिए सारवां थाना प्रभारी संदीप कुमार, कुंडा थाना प्रभारी प्रशांत कुमार और मोहनपुर थाना प्रभारी की टीम जुटी. पुलिस ने घटनास्थल के आसपास और आने-जाने वाले रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले. हालांकि, फुटेज में कारोबारी की ओर से बताए गए घटनाक्रम के समर्थन में कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिला. कथित वारदात के दौरान संदिग्ध बाइक सवारों की गतिविधियां भी सामने नहीं आईं. जांच के दौरान मिले तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों में अंतर दिखाई देने के बाद पुलिस का शक कारोबारी पर गहराने लगा.
पूछताछ में सामने आई साजिश, कर्ज बना वजह
सीसीटीवी फुटेज से कथित लूट की कहानी की पुष्टि नहीं होने के बाद पुलिस ने राजेंद्र मंडल से कड़ाई से पूछताछ की. पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान कारोबारी ने लूट की झूठी कहानी गढ़ने की बात स्वीकार कर ली. जांच में सामने आया कि वह कर्ज के बोझ से परेशान था और महाजन लगातार रुपये लौटाने के लिए दबाव बना रहे थे. इसी परेशानी से बचने के लिए उसने कथित लूट की साजिश रची थी. हालांकि, मामले में कारोबारी की स्वीकारोक्ति और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की विस्तृत जानकारी का इंतजार है.
चार घंटे में पुलिस ने किया मामले का खुलासा
5.60 लाख रुपये की लूट की सूचना मिलने के बाद इलाके में हलचल मच गई थी. मामला हथियार के बल पर दिनदहाड़े लूट का बताया गया था, इसलिए पुलिस ने जांच में तेजी दिखाई. घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल और कारोबारी से पूछताछ के जरिए पुलिस ने महज चार घंटे के भीतर मामले का खुलासा कर दिया. पुलिस जांच के मुताबिक, जिस वारदात को वास्तविक लूट बताया जा रहा था, वह कर्ज और महाजनों के तकादे से बचने के लिए रची गई झूठी कहानी थी. मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जानकारी सामने आनी बाकी है.

