वियतनाम और हांगकांग के बाद भारत में तबाही मचाएगा WIPHA!
वियतनाम और हांगकांग में भारी तबाही मचाने के बाद चक्रवाती तूफान विफा तेजी से भारत की ओर बढ़ रहा है. मौसम विभाग ने विफा पर अपडेट जारी करते हुए बताया है कि उष्णकटिबंधीय चक्रवात का अवशेष उत्तरी बंगाल की खाड़ी के ऊपर उभरा है. चक्रवात के कारण आज सुबह एक निम्न दबाव का क्षेत्र बना. इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम ...


वियतनाम और हांगकांग में भारी तबाही मचाने के बाद चक्रवाती तूफान विफा तेजी से भारत की ओर बढ़ रहा है. मौसम विभाग ने विफा पर अपडेट जारी करते हुए बताया है कि उष्णकटिबंधीय चक्रवात का अवशेष उत्तरी बंगाल की खाड़ी के ऊपर उभरा है. चक्रवात के कारण आज सुबह एक निम्न दबाव का क्षेत्र बना. इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने और अगले 24 घंटों के दौरान उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के तटों पर निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है. इसके कारण झारखंड समेत देश के कई राज्यों में भारी से भारी बारिश होने की संभावना है.
मछुआरों को चेतावनी
अगले 7 दिन में कर्नाटक,केरल, तेलंगाना, तटीय आंध्र प्रदेश, गोवा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भारी बारिश की संभावना है. वहीं 28 जुलाई तक झारखंड समेत देश के पूर्वी और मध्य भागों में भी भारी हो सकती है और करीब 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती है. मौसम विभाग ने विफा को लेकर मछुआरों के लिए चेतावनी जारी किया है. जिसमें मछुआरों को सलाह दी गयी है कि वे 24 जुलाई से 28 जुलाई 2025 तक इन क्षेत्रों में न जाएं.
विफा ने कहां कितनी तबाही मचाई
20 से 22 जुलाई तक विफा तूफान ने अपना विकराल रूप दिखाया है. 20 जुलाई को इसने लुज़ोन द्वीप के पास 120 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से प्रवेश किया. इसने बारिश और भूस्खलन से कैगायन वैली और बिकोल क्षेत्रों में तबाही मचाई. 5 लोगों की मौत, 7 लापता और 50,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए. 400 सड़कें और 30 पुल क्षतिग्रस्त हुए. 21 जुलाई को इसने हांगकांग और ग्वांगडोंग में 167 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से लैंडफॉल किया. इसे ज़ुहाई और ग्वांगडोंग में 471 पेड़ उखड़े, 400 से ज्यादा उड़ानें रद्द हुईं और 26 लोग घायल हो गए. 22 जुलाई को विफा हानोई और हंग येन में पहुंचा, तो इसकी रफ्तार थोड़ी कम हो चुकी थी. इस दौरान 102 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से विफा ने लैंडफॉल किया. 500 मिलीमीटर तक बारिश हुई और बाढ़ के चलते सड़कों, स्कूलों और खेतों को नुकसान पहुंचा. इससे निपटने के लिए 3,50,000 सैनिक तैनात किए गए.

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