दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि, नेमरा में 14 फीट प्रतिमा का होगा अनावरण
दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर आज रामगढ़ के नेमरा-लुकैयाटांड़ में मुख्य श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित हो रहा है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 14 फीट ऊंची आदमकद प्रतिमा का अनावरण करेंगे.

Ranchi/Ramgarh: झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि आज पूरे राज्य में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जा रही है. मुख्य कार्यक्रम रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड स्थित उनके पैतृक गांव नेमरा के लुकैयाटांड़ में आयोजित किया गया है. यहां बड़ी संख्या में समर्थक, जनप्रतिनिधि, झारखंड आंदोलनकारी और आम लोग गुरुजी को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लुकैयाटांड़ स्थित स्कूल परिसर में शिबू सोरेन की 14 फीट ऊंची आदमकद प्रतिमा का अनावरण करेंगे. इसके बाद श्रद्धांजलि सभा आयोजित होगी, जिसमें करीब 10 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है.
14 फीट ऊंची प्रतिमा का होगा अनावरण
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज लुकैयाटांड़ स्थित सोना सोबरन प्लस टू हाई स्कूल परिसर में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की 14 फीट ऊंची आदमकद प्रतिमा का अनावरण करेंगे. प्रतिमा अनावरण के बाद श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाएगा. कार्यक्रम में राज्य सरकार के कई मंत्री, सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि, झारखंड आंदोलनकारी और सोरेन परिवार के सदस्य शामिल होंगे. इसके अलावा विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में समर्थकों के भी पहुंचने की संभावना है. कार्यक्रम के लिए करीब 10 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है. राज्य सरकार की ओर से झारखंड के सभी 24 जिलों में भी शिबू सोरेन की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि और स्मरण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. इन कार्यक्रमों के जरिए उनके राजनीतिक जीवन, झारखंड आंदोलन में योगदान और राज्य निर्माण में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को याद किया जाएगा.
देशभर से पहुंचेंगे समर्थक, आदिवासी समाज की भी होगी भागीदारी
दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद उनके पैतृक गांव नेमरा में देशभर से बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे. चार अगस्त 2025 को उनके निधन के बाद नेमरा में अंतिम संस्कार किया गया था. उस दौरान लगातार कई दिनों तक देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां पहुंचते रहे. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी कई दिनों तक नेमरा में रहकर सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल हुए थे. पहली पुण्यतिथि के मौके पर भी झारखंड के अलावा ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों से समर्थकों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. श्रद्धांजलि सभा में आदिवासी समाज की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिल सकती है. गुरुजी के समर्थक और झारखंड आंदोलन से जुड़े लोग उनके संघर्ष, विचारों और राज्य के निर्माण में उनके योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे.
नेमरा में भव्य तैयारी, सुरक्षा और सुविधाओं के इंतजाम
शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि को लेकर नेमरा के लुकैयाटांड़ में व्यापक तैयारियां की गई हैं. सोना सोबरन प्लस टू हाई स्कूल परिसर में उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित की गई है. कार्यक्रम स्थल पर करीब 400 फीट लंबा जर्मन हैंगर पंडाल तैयार किया गया है, जिसमें हजारों लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है. कार्यक्रम को देखते हुए हेलीपैड और वीआईपी पार्किंग की व्यवस्था भी की गई है. इसके अलावा लोगों की सुविधा के लिए भोजन स्टॉल, पेयजल और स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं. सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं. गोला चौक से नेमरा तक श्रद्धांजलि बैनर लगाए गए हैं. पूरे इलाके को झामुमो के झंडों, आकर्षक रोशनी और सोहराय पेंटिंग से सजाया गया है. गुरुजी के पैतृक आवास और समाधि स्थल पर भी सामाजिक परंपराओं के अनुसार श्रद्धांजलि कार्यक्रम के लिए विशेष व्यवस्था की गई है.
झामुमो ने सोशल मीडिया पर किया गुरुजी को याद
दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से भी उन्हें श्रद्धांजलि दी गई है. पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शिबू सोरेन की तस्वीर साझा कर उनके योगदान को याद किया. पोस्ट में ‘स्मृति शेष दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी अमर रहें, जय झारखंड’ का संदेश लिखा गया है. इसके साथ ही तस्वीर में शिबू सोरेन के विचारों को भी साझा किया गया है. पार्टी की पोस्ट के मुताबिक, गुरुजी शिक्षा को समाज के अधिकारों की रक्षा और सशक्तिकरण का सबसे बड़ा माध्यम मानते थे. झारखंड आंदोलन के दौरान शिबू सोरेन ने आदिवासी और मूलवासी समाज के अधिकारों को लेकर लंबे समय तक संघर्ष किया. अलग झारखंड राज्य के गठन की लड़ाई में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही. यही वजह है कि उनकी पुण्यतिथि पर राज्यभर में उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया जा रहा है.
झारखंड आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे शिबू सोरेन
शिबू सोरेन झारखंड आंदोलन के उन प्रमुख नेताओं में शामिल रहे, जिन्होंने अलग राज्य की मांग को लेकर लंबे समय तक संघर्ष किया. आदिवासी समाज के अधिकारों, जल-जंगल-जमीन और क्षेत्रीय पहचान से जुड़े मुद्दों को उन्होंने लगातार उठाया. झारखंड राज्य के गठन के बाद भी प्रदेश की राजनीति में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही. वह राज्य के मुख्यमंत्री भी रहे और झारखंड मुक्ति मोर्चा के सबसे प्रभावशाली नेताओं में उनकी पहचान बनी. उनके राजनीतिक जीवन का बड़ा हिस्सा झारखंड के सामाजिक और राजनीतिक बदलाव से जुड़ा रहा. उनकी पहली पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रमों में उनके संघर्ष और योगदान को याद किया जा रहा है. नेमरा में होने वाला मुख्य श्रद्धांजलि कार्यक्रम उनके परिवार, समर्थकों और झारखंड आंदोलन से जुड़े लोगों के लिए भावनात्मक अवसर है. इस मौके पर गुरुजी की प्रतिमा का अनावरण उनके विचारों और विरासत को आगे बढ़ाने के संकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है.

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