रामगढ़ में सीसीएल की बंद खदान में चाल धंसने से 4 की मौत, 3 घायल, शवों के साथ ग्रामीणों का हंगामा
Ramgarh: रामगढ़ में सीसीएल करमा परियोजना के खुले खदान में चाल धंसने से चार लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन लोग घायल हो गए. घायलों में से एक की हालत नाजुक है. वहीं कई लोग अभी भी चाल के अंदर फंसे हुए हैं, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है, लेकिन बारिश की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कत आ रही है. उधर ग्रामीणों ने...


Ramgarh:
रामगढ़ में सीसीएल करमा परियोजना के खुले खदान में चाल धंसने से चार लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन लोग घायल हो गए. घायलों में से एक की हालत नाजुक है. वहीं कई लोग अभी भी चाल के अंदर फंसे हुए हैं, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है, लेकिन बारिश की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कत आ रही है. उधर ग्रामीणों ने सीसीएल प्रबंधन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है. गुस्साए लोग शव के साथ हंगामा कर रहे हैं. ग्रामीण और विभिन्न राजनीतिक दलों के लोगों ने सीसीएल प्रबंधन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है. गुस्सए लोग शव को करमा PO कार्यालय के सामने रखकर मुआवजे की मांग कर रहे हैं. उधर पुलिस ने भारी संख्या में फोर्स तैनात कर दिया है.
गौरतलब ही कि महुआटुंगरी से सटे खुले खदान में 4 बजे का करीब दर्जन भर की संख्या में ग्रामीण कोयले की अवैध खनन करने गए थे. इसी दौरान एकाएक चाल धंस गया. इसमें 4 लोगों की दबने से मौत हो गई. जबकि तीन लोग घायल हो गए. मृतकों में सुगिया निवासी निर्मल मुंडा, वकील करमाली, महुआटुंगरी निवासी इम्तियाज खान उर्फ लालू खान, जोभिया रजरप्पा निवासी रामेश्वर मांझी शामिल हैं. वहीं, घायलों में इम्तियाज खान की पत्नी रोजिदा खातून, सरिता देवी, और अरुण मांझी शामिल है. अरुण की हालत गंभीर बतायी जा रही है.
घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे लोगों ने तीन लोगों को बाहर निकाला और इलाज के लिए अस्पताल ले गए. लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया. मलबे में दबे एक व्यक्ति को जेसीबी और शौवेल मशीन से बाहर निकाला गया. मलबे में फंसे मजदूरों को विशेष उपकरणों की मदद से निकाला जा रहा है और संभावित हवा और रोशनी के लिए वेंटिलेशन छेद बनाए जा रहे हैं.
इस हादसे ने खनन क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जानकारी के मुताबिक इस खदान को कुछ दिन पहले ही बंद किया था. ब्लास्टिंग के बाद सुरक्षा इंतज़ामों के बिना ही इसे छोड़ दिया गया, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को मौका मिला वहां फिर से कोयला निकालने का काम करने लगे. सिर्फ रामगढ़ ही नहीं प्रदेश के सभी बंद खदानों में इसी तरह अवैध खनन होता है और हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है. बंद खदानों में कोई निगरानी न होना, सुरक्षा घेरा न लगाना और स्थायी सीलिंग की अनुपस्थिति ने इस तरह के हादसे को आमंत्रण देते रहते हैं.

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